चाह रखता है

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

जो मन तन्हा है

वो साथ पाने की

चाह रखता है

जो दिल सूना है

वो प्यार पाने की

चाह रखता है

जो रिश्ता कोई टूट

गया तो वो उसे जोड़ने की

चाह रखता है

जो कोई रूठ गया 

तो वो उसे मनाने की

चाह रखता है

जो कोई बिछड़ गया

तो वो उसे पाने की

चाह रखता है

जो तन बीमार है

वो निरोगी होने की

चाह रखता है

जो मन ईश्वर में 

रमा हो वो उसे पाने की

चाह रखता है

जो हार रहा हो

वो जीत की

चाह रखता है

जो दुःखों से घिरा हो

वो सुखों की

चाह रखता है

जो चल नहीं सकता

वो चलने की चाह रखता है

जो बोल नहीं सकता

वो बोलने की चाह रखता है

जो सुन नहीं सकता

वो सुनने की चाह रखता है

जो दिल साथ छोड़ रहा

वो उसके धड़कने की चाह रखता है

जो साँसें उखड़ रहीं हो

वो उन साँसों के साथ की

चाह रखता है

इस तरह जब तक जीवन है

हर कोई किसी न किसी चीज़

की चाह रखता है... यही तो

आस और विश्वास की वो डोर है 

जो मन, तन, धड़कन, सांसों को बांधे रखती है 

टूटने,हारने, बिखरने  से।।

.....मीनाक्षी सुकुमारन

       नोएडा