भगवान वावन ने राजा बलि से मांगी साढ़े तीन कदम धरती

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

पीलीभीत। गजरौला थाना क्षेत्र के गांव महुआ में समस्त ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा  व्यास शास्त्री श्री नरेंद्र  अंजान लखीमपुर जिला के गांव नौगवां हाकिमपुर से पधारे। श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं ने राजा बली कथा का रसपान किया।राजा बलि से भगवान वावन ने दान में राजा बलि से साढ़े तीन कदम भूमि मांगी।गुरु शुक्राचार्य ने 52 उँगन के भेष में साधु को पहचान लिया।राजा बलि को बताया कि साधु भेष में भगवान विष्णु है जो आपके राज पाठ को छलने आया।दानी राजा बलि ने कहा मैंने साधु को वचन दे दिया वचन नही तोडूंगा।राजा ने अपना सब कुछ दान कर दिया ।भागवत महापुराण कथा शास्त्री श्री नरेंद्र अनजान के मुखारविंद से कथा का रसपान कर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने दैवीय क्रिया कलापों को भी मार्मिक ढंग से सुनाया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान बीर बल ,धनी राम ,राम बहादुर, टीकाराम,अजय वीर यादव ,गौरीशंकर, वर्मा प्रसाद,अजय यादव, हरी शंकर यादव,देवदत्त, लल्लू मौर्य, राम औतार,पाती राम,गुड्डू पासवान,सुरेश गौतम,सुरेश राठौर, राधे श्याम,भगवान दास, अजय,परमेश्वरी दयाल,डाल चंद, दिनेश यादव,राम सिंह यादव,वेद प्रकाश,मोती राम,नोनी राम ,मुन्ना लाल,बुलाकी राम आदि सैकड़ो भक्तगण मौजूद रहे।

लोकगीत ने दिलाई नरेंद्र अंजान को पहचान

नरेन्द्र के लोकगीतों की लोग कसीदे पढ़ रहे । लोकगीतों को वह स्वयं लिखते हैं वही क्षेत्रीय लोकगीत 'चूल्हा फूंकब नाई राजा जी तुम्हारे अंगना' को नरेन्द्र अनजान और उनके शिष्य दुर्गेश बाबू ने गाया। लोगों को लोकगीत खूब पसंद आया।यूट्यूब पर इस लोकगीत को 61 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।वही एक लाख से अधिक फ़ॉलोअर्स हैं। लोकगीत को राधे कैसेट लखीमपुर के माध्यम से गाया गया।

यादव जाति से ताल्लुक रखते हैं अंजान

श्रीमद्भागवत पुराण कथा व्यास अधिकतर ब्राह्मण समाज से श्रवण कराते है। बचपन से ही नरेन्द्र को गायकी का शौक था।उनके पिता खेती करते हैं नरेंद्र के गुरु भी यदुवंशी(यादव)हैं।






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