-डाक्टर सानन्द सिंह, डाक्टर मसीहउद्दीन और डाक्टर दिलीप कुमार ने डाला प्रेमचन्द के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विशेष रूप से प्रकाश
लखनऊ। नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश श्री रामगोविंद चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में देश गम्भीर संकट के दौर से गुजर रहा है। देश को इस गम्भीर संकट से उबारने के लिए कवि, शायर, कहानीकार, उपन्यासकार, पत्रकार और कलाकारों को आगे आना चाहिए। यही उपन्यास सम्राट, महान कहानीकार मुन्शी प्रेमचन्द को सच्ची श्रद्धांजलि है, सच्चा प्रणाम है।
शनिवार को मेज़बान होटल, लखनऊ के सभागार में आयोजित एक प्रणाम - मुंशी प्रेमचन्द के नाम सेमिनार और मुशायरा कवि सम्मेलन में बतौर मुख्यअतिथि नेता प्रतिपक्ष श्री रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि आज देश का संविधान संकट में है, लोकतन्त्र संकट है, व्यापार संकट में है, खेती संकट में है, नौकरी संकट में है, सद्भाव संकट में है, हमारी आपकी वह एकता भी संकट में है जिसके बल पर हम लोगों ने अंग्रेजों को पछाड़ा था। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में हिन्दू और मुसलमान एक साथ फांसी पर चढ़े, एक साथ जेल काटे, एक साथ तरह तरह की यातना सहे। दुर्भाग्य से आज देश में एक ऐसा वर्ग पैदा हो गया है जो मुसलमानों की देशभक्ति पर ही शक कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष श्री रामगोविंद चौधरी ने कहा कि जिस तरह से मुन्शी प्रेमचन्द ने अपनी लेखनी से सामाजिक विसंगतियों के साथ साथ अंग्रेजी सल्तनत के जुल्म के खिलाफ भी कलम चलाया, लोगों को जगाया, उसी तरह से आप शायर, कवि और कलाकार लोग भी सामाजिक विसंगतियों के साथ इन नए हुक्मरानों के खिलाफ कलम चलाएं।
इस अवसर पर
बतौर मुख्यवक्ता जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डाक्टर सानन्द कुमार सिंह ने कहा कि उपन्यास सम्राट, महान कहानीकार मुन्शी प्रेमचन्द केवल साहित्य के नहीं, स्वतन्त्रता संग्राम के भी महानायक थे। उन्होंने प्रथम कहानी संग्रह "सोज़े वतन" जब्त होने पर अंग्रजों के सामने घुटना नहीं टेका, माफी नहीं मांगी, अपना नाम बदल लिया और धनपत राय की जगह मुन्शी प्रेमचन्द के नाम से लिखना शुरू किया। इस नए नाम से उन्होंने इतना लिखा कि साहित्यिक जगत में वह युग ही मुन्शी प्रेमचन्द युग हो गया। उन्होंने लिखा कि मैं जिस दिन न लिखूं, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं। उन्होंने लिखा कि अन्याय में सहयोग देना अन्याय करने के समान है। प्रणाम ऐसे मुन्शी प्रेमचन्द को, शत शत बार प्रणाम।
सेमिनार में विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी के डा. मसीहउददीन ख़ां ने मुन्शी प्रेमचन्द के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सच है कि मुन्शी प्रेमचन्द का जन्म वाराणसी के लमही में हुआ था, वह बनारस के थे, वह बनारस के हैं, लेकिन वह लखनऊ से बेपनाह मोहब्बत करते थे। उनके अदबी जीवन का एक बड़ा हिस्सा लखनऊ में गुजरा। इसलिए हम लखनऊ वाले भी बड़े फख्र से कह सकते हैं कि मुन्शी प्रेमचन्द हमारे हैं। खासतौर से लाटूश रोड और मारवाड़ी गली में गुजरा मुन्शी प्रेमचन्द का जीवन केवल लखनऊ की नहीं, हिंदी उर्दू साहित्य की अनमोल धरोहर है। इसे लेकर व्यापक शोध किए जाने की जरूरत है।
डाक्टर खान ने कहा कि प्रेमचन्द के नेतृत्व में ही लखनऊ के रिफा-ए-आम क्लब में प्रगतिशील लेखक संघ का पहला अधिवेशन हुआ जिसे प्रगतिशील आन्दोलन के इतिहास में आज भी एक ऐतिहासिक अधिवेशन के रूप में याद किया जाता है।
एक प्रणाम - मुन्शी प्रेमचन्द के नाम सेमिनार में विषय प्रवर्तक के रूप में उपस्थित मिरांडा हाउस, दिल्ली युनिवर्सिटी के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर दिलीप कुमार ने कहा कि मुन्शी प्रेमचन्द के कार्यकाल में जो विसंगतियां थी, उसमें से कुछ घटी जरूर हैं लेकिन बहुत सी बनी हुई हैं। खासतौर से महिला उत्पीड़न और साम्प्रदायिक नफरत के क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभी छुआछूत और जात के आधार पर बड़े छोटे की भावना भी मिटी नहीं है। इसलिए हम सभी लोगों को अपने लेखन में इन विसंगतियों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित सुल्तानपुर इसौली से विधायक अबरार अहमद ने अमन और सबके कल्याण के लिए दुआ की।
इस अवसर पर दूसरे विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ शायर जावेद एकबाल बदायुनी ने मुन्शी प्रेमचन्द के व्यक्तित्व को अर्पित अपनी नज़्म सुनकर पूरे माहौल को शायराना माहौल में बदल दिया। उनके दो शेर,
"तुम याद हो हमें यह बताने को आये हैं।
मुंशी तुम्हारा जश्न मनाने को आये हैं।
और
साहित्य भीगी आँखों से करता तुम को याद,
उर्दू अदब उदास है मुंशी तुम्हारे बाद।"
काफी पसंद किए गए।
इसके बाद तो सर्वश्री हसन काज़मी,
रफ़त शैदा सिद्दीक़ी,
डाः आरिफ़ नजमी,
शहबाज़ तालिब,
हर्षित मिश्रा,
जलाल लखनवी,
अरमान मसूद,
माधव बाजपई,
आसिम काकोरवी,
डाक्टर अफ़रोज़ तालिब,
मोहम्मद अली साहिल और धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव आदि ने अपनी अपनी गज़ल हजल और कविताओं से समां बांध दिया।
मुशायरे की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर जावेद एकबाल बदायुनी और सन्चालन आमिर साबरी ने किया।
इस अवसर पर पत्रकार माधव वाजपेयी की पुस्तक ' महकते जज़्बात ( गज़ल संग्रह ) और 'कोरोनोलाॅजी इन कोविडटून्स' का लोकार्पण नेता प्रतिपक्ष श्री रामगोविंद चौधरी ने किया।
आयोजन समिति ने
सेमिनार और मुशायरे में उपस्थित सामाजिक नेत्री अज़रा मुबीन को फूल भेंट कर सम्मानित किया तथा जनवादी कलाकार रिज़वान, समाजिक सेनानी संतोष यादव ( कानपुर देहात ), रमेश यादव, सुनील यादव, गोपाल यादव ( गाज़ीपुर ), सुहैल सिद्दीकी एडवोकेट, मोहम्मद शैफ और अपनी महिला टीम के साथ आईं किसान नेत्री श्रीमती रमावती देवी के प्रति विशेष रूप से सम्मान प्रकट किया।
एक प्रणाम कार्यक्रम की शुरुआत मुन्शी प्रेमचन्द के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर हुई जिसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व विधान परिषद सदस्य विंध्यवासनी कुमार ने की। इस अवसर मुन्शी प्रेमचन्द को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री विंध्यवासनी कुमार ने इस आयोजन के लिए आयोजकों की जमकर सराहना की।
अखिल भारतीय अल्पसंख्यक फेडरेशन के अध्यक्ष डाक्टर रईस खान, मजरूह सुल्तानपुरी मेमोरियल ट्रस्ट के महासचिव नफ़ीस अहमद, मिल्लत विकास मंच के अध्यक्ष आमिर साबरी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी ने एक प्रणाम - मुन्शी प्रेमचन्द के नाम सेमिनार और मुशायरा- कविसम्मेलन में आए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।