बिजलियाँ भी गिराते होंगे

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


लोग तन्हाई में आँसू ,

बहाते होंगे,

याद कर मांजी को दिल,

भी जलाते होंगे । 

मेरे मुकद्दर में उजाले की ,

किरन कहाँ ,

लोग बेकार में बिजलियाँ भी ,

गिराते होंगे ,

मैं कोई भगवान नहीं जो,

ये तोहमत है ,

लोग पत्थरों को भी भगवान ,

बनाते होंगे ,

मंजिले है दूर , तकलीफ ,

तो आयेगी ,

न कर अफसोस सफीने भी ,

मगर कभी ,

तूफानों की जद में आ ,

जाते होंगे ,

उसके होंठों के तबस्सुम पे ,

न जा मुश्ताक ,

नासूर दिल के कई उसको भी ,

रुलाते होंगे ,


डॉ . मुश्ताक़ अहमद  शाह

 "सहज़"हरदा  मध्यप्रदेश