खबरों से बेखबर

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


खबरों से वह ताउम्र बेखबर रहे।

फिर भी हर समाचार पत्र की 

सुर्खियों में रहे।


कोई सड़क ऐसी नहीं रही।जहां से

वह ना गुजरे।और विगत को भूलाकर 

 हर बार नई राह पकड़े।


हंसने और हंसाने के लिये सौ दर्द

ले गये। सौ दर्द दे गये। इक बार फिर

जख्मों के निशां छोड़ गये।


गर उनको है आरजू - ए - अमन तो

उसी से मांग राह। वही दिखालायेगा

चमन।


उनसे फासले थे ऐसे जो ताउम्र रहे।

सिलसिले भी क्या खूब थे। ना इधर 

के रहे और ना उधर के रहे।


वह दांव पर दांव लगा खेलते रहे।

हंसने की इक खुशी के लिये हम

दांव पर लगते चले गये।


कुछ जख्म सूद संग दे गये। जो

इस सदी से उस सदी तक चलते ही

चले गये ।


खबरों से वह ताउम्र बेखबर रहे।

फिर भी हर समाचार पत्र की 

सुर्खियों में रहे।


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार 

ramamedia15@gmail.com