प्रेम में है शक्ति अपार,
प्रेम में ही टिका ये संसार,
प्रेम है जैसे वर्षा की फुहार,
जिससे मिले शीतलता अपार।
माता-पिता का प्रेम है निश्छल,
जिससे मिलती शक्ति अपार,
मिलता है हमें सहारा,
मन में भरता है आत्मविश्वास।
प्रेम है इक मीठा एहसास,
जो बनाता अजनबी को खास,
मन से मन को जोड़ देता,
दूर होकर भी एक-दूजे से,
कराता पास होने का एहसास।
एक सोचे दूजा बूझे,
एक को दर्द हो तो दूजा तड़पे,
बिन कहे ही जान जाते,
मन में जो होती है बात।
एक प्रेम था प्रहलाद का,
खंभे से निकले भगवान,
एक प्रेम था कृष्ण राधा का,
दोनों ही थे एक समान।
एक प्रेम था भगत सिंह का,
देश की खातिर दे दी जान,
प्रेम होता है विश्वास मन का,
रखता है मन को साफ,
प्रेम में नहीं रहता है बंधन,
प्रेम में देते स्वयं ईश्वर साथ।
स्वरचित -अनामिका मिश्रा
झारखंड सरायकेला (जमशेदपुर)