भारत पारंपरिक, आधुनिक ज्ञान प्रणालियों, टैलेंट की खान - आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रतिभा निख़ारने के जुनून की जरूरत

 

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भारतीय ज्ञान परम्पराओं, कला, संस्कृति और खेल प्रतिभाओं को तराशने की जरूरत - हम एक नए युग की शुरुआत की नींव रख सकते हैं - एड किशन भावनानी

गोंदिया - भारतीय ज्ञान प्रणाली, भाषा, कला, साहित्य संस्कृति, और खेल हजारों साल पुरानी है। जिसे हम इतिहास और पौराणिक संकलन केंद्र में देख सकते हैं कि कैसे हमारे पूर्वज लिपिबद्ध तरीके से मोर के पंख से लेखनी को लिपिबद्ध करते थे। भारत एक पौराणिक ज्ञानियों, कला, संस्कृति आध्यात्मिकता, की पावन स्थली है। जहां ज्ञान की महारत हासिल है। हमने अपने बड़े बुजुर्गों से भी सुने होंगे कि भारत एक सोने की खान है जहां ज्ञान, जन,धन सभ अखुट ख़ज़ाना भरा है!!! बस जरूरत है इसे तराशने की। हम सब जानते हैं कि हीरो की ख़ान में जब हीरा रहता है तो पत्थर की तरह दिखता है। जब कारीगर उसे तराशते हैं तो उसकी कीमतकरोड़ों में हो जातीहै।बस!!! यही!!!अनुकूल ख़ज़ाना हमारे भारतीय पावन भूमि और उस पर रहने वाले हर नागरिक की बौद्धिकता में वह पारंपरिक ज्ञान टैलेंटसमाया हुआ है। बस उसे तराशने अर्थात कोच याने कौशल विकास का मार्गदर्शन करने की जरूरत है। जिससे उस टैलेंट को सही दिशा मिल सके और भारत को वापस वही सोने की खान बनाने के जुनूनमें तब्दील कर दे!!! साथियों बात अगर हम ख़ेल जगत में पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के कौशल विकास और प्रोत्साहन की करें तो हम टोक्यो ओलंपिक 2021 में देख रहे हैं कि हमारे खिलाड़ी कैसे जांबांजी से उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सवाल हार जीत का नहीं है आज हारे हैं तो कल जीतेंगे आज सिल्वर, ब्रांस मेडल लिए हैं तो कल गोल्ड लेंगे जब हमारी दिशा सही रहेगी तो हमारा जज़बा हमें कल जरूर गोल्ड दिलाएगा क्योंकि सम्मान, प्रशंसा, प्रोत्साहन, हमारे कार्य की दक्षता को बढ़ाता है। अगले ओलंपिक में गोल्ड मेडल की बारिश होगी। जिस तरह हमने देखे के पीएम ने पुरुष और महिला हॉकी खिलाड़ी के कैप्टन, रेसलर सहित अनेकों खिलाड़ियों से सीधे टोक्यो में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शनपर प्रोत्साहन के लिए वर्चुअल बात की तो हर भारतीय का दिल खुश हो गया!!! मैं भी उत्साहित हो गया कि काश मैं भी ऐसा खिलाड़ी होता और पीएम मुझसे भी बात करते।...साथियों बात अगरहमआत्मनिर्भर भारत बनाने की करें तो हर क्षेत्र में भारत में पारंपरिक, आधुनिक, ज्ञान प्रणालियों, टैलेंट, की खान है बस!!! जरूरत है हमें उसकी प्रतिभा को निखारने की जो हमने प्रमाणिक रूप से अभी देखे के ओलंपिक में भले ही गोल्ड मेडल नहीं जीते हैं दिनांक 5 अगस्त 2021 तक दो सिल्वर और तीन ब्रांज मेडल जीते हैं। परंतु खिलाड़ियों से पीएम ने वर्चुअल डायरेक्ट बात की वह काबिले तारीफ है। इसी हौसले और जज़्बे के बल पर अगले ओलंपिक में गोल्डन की उम्मीद कायम है।...साथियों बात अगर हम दिनांक 5 अगस्त 2021 को आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली, भाषा, कला एवं संस्कृति पर राष्ट्रीय वेबीनार के आयोजन की करें तो उसमें भी कहा गया कि कई समकालीन चुनौतियों का समाधान हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में निहित है। पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री ने भी, समकालीन समय में पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों और प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता तथा एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीयता की भावना के साथ कला, संस्कृति, भाषाओं को ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों के साथ जुड़े बिना कोई भी समाज सफल नहीं हो सकता है। हमारा अतीत स्थापत्य कला की भव्यता, इंजीनियरिंग के चमत्कार और कलात्मक उत्कृष्टता से भरा हुआ है। उन्होंने आह्वान किया कि भारत की इस सांस्कृतिक संपदा का संरक्षण, प्रोत्साहन और प्रसार देश की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि यह देश की पहचान के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने 21वीं सदी के भारत के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और इसमें हमारी पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों पर जोर दिया गया है। भारतीय ज्ञान की परम्पराओं को आगे बढ़ाकर, हम एक नए युग की शुरुआत की नींव रख सकते हैं। हमें युवाओं के साथ जुड़ने के लिए अपने पारम्परिक ज्ञान को समकालीन, संदर्भगत प्रासंगिकता से जोड़ना चाहिए, कई समकालीन चुनौतियों के समाधान हमारी पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों में निहित हैं। वहीं उच्च शिक्षा सचिव राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के निर्माण और उससे जुड़ी बुनियादी बातों पर प्रकाश डाला कि एनईपी नए भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम है और यह पीएम के आत्मनिर्भरता हासिल करने के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। अन्य अधिकारी ने 21वीं सदी में पारम्परिक भारतीय ज्ञान के संबंध में नई एनईपी 2020 की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, संस्कृति, सभ्यता, कला, विभिन्न प्राचीन शिक्षाएं, इतिहास आदि हमारी गौरवशाली परम्पराओं का अहम भाग रहे हैं और हमारी युवा पीढ़ी को इन परम्पराओं की जानकारी होनी चाहिए तथा उन्हें इनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया।...साथियों बात अगर हम वर्तमान परिस्थितियों की करें तो हमें यह एहसास हो रहा है कि हमने इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ा दिए हैं और विपक्ष सहित हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि इसमें अपना सहयोग रूपी अंशदान करें। इस विकास के महान यज्ञ में सहयोग रूपी आहुति देकर अपने कौशल को पहचानने का जुनून धारण कर भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा कर सहयोग करें। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत पारंपरिक, आधुनिक, ज्ञान प्रणालियों, टैलेंट की खान है। आत्मनिर्भर भारत के निर्माणमें प्रतिभा निखारने के सकारात्मक जुनून की जरूरत है। भारतीय ज्ञान, परंपरा, कला, संस्कृति, और खेल प्रतिभाओं को तराशने की जरूरत है। जिससे हम एक नए युग की शुरुआत की नीव रख सकते हैं। 


-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र