एक शख्सियत आर उमारानी

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

नौकरी के साथ भी नौकरी के बाद भी आर उमारानी उर्जा से भरपूर एक महिला सख्शियत जो किसी पहचान की मोहताज नहीं। अपने आप में एक उभरता हुआ नाम और पहचान बन चुकी हैं। भारत संचार निगम लिमिटेड से सेवा निवृत आर उमारानी अपने सेवाकाल के दौरान भी बिना यह सोचे की मुझे इससे क्या लाभ मिलेगा और मैं इसकी मदद क्यों करूं। इस बात को दरकिनार कर लोगों की निःस्वार्थ मदद करना उनकी आदत में आ चुका है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित होटल पलाश के सदर्न स्पाइस रेस्टोरेंट में मैनेजर के पद पर कार्यरत आर उमारानी से हमारी विस्तृत चर्चा हुई। 

अपनी विश्वविधालय की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् भोपाल शहर में उनका आगमन हुआ। शुरू में दक्षिण भारतीय होने के कारण भाषा की समस्या हुई। लेकिन कुछ ही महिनों के प्रयास के बाद कामचलाऊ हिंदी सीख ली और फिर लगातार प्रयास से हिंदी में संवादों का आदान - प्रदान निरंतर करने लगीं। कार्यक्षेत्र एवं आस- पास के माहौल में ढलने में कुछ समय दिक्कत आई लेकिन अपने प्रयास इन्होनें निरंतर जारी रखे। नौकरी के साथ भी कुशलतापूर्वक विभिन्न तरह के व्यवसायों को करते हुए समाज सेवा के क्षेत्र में आज भी यह सक्रिय हैं। लोग कहते हैं उम्र सिर्फ एक नम्बर है। किसी भी कार्य को करने की ईच्छा हो तो उम्र का कोई बंधन नहीं। जरूरी नहीं कि समाज सेवा बड़े स्तर पर ही की जाये। 

छोटे स्तर पर किये गये छोटे - छोटे कार्य भी समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि भोजन,वस्त्र,फल,दवाईयां या अन्य जरूरी चीजों को या किसी की मदद करते हुए फोटो या विडियो सामाजिक माध्यम जिसे हम सोशल मिडिया भी कहते हैं। वहां पर पोस्ट किये जायें या किसी समाचार पत्र या किसी पत्रिका का हिस्सा बन वहां छपें। अड़ोसी - पड़ौसी,जान पहचान वाले या अन्जान व्यक्ति की निःस्वार्थ मदद बिना किसी दिखावे या साक्ष्य इकट्ठा किये बिना भी कि जा सकती है। सच्चे अर्थों में यही निःस्वार्थ समाज सेवा है।

 ऐसे समाज सेवक या समाज सेविकाएं हाईलाईट होना नहीं चाहते। इनका तो सीधा सा सिद्धांत होता है, "नेकी कर दरिया में डाल"। आर उमारानी इसी तरह की सख्शियतों में से एक हैं। इन्हें जानने पहचानने वाले अक्सर कोई समस्या आने पर यह कहते हैं कि उमारानी है,तो चिन्ता की क्या बात है। अपना मिलनसार व्यक्तित्व,खुशमिजाज आदत,मधुर व्यवहार के साथ ही परोपकार तथा सेवा की भावना के साथ हरदम हर समय मदद को तत्पर रहने वाली आर उमारानी का  जीवन चुनौतियों से भरा रहा फिर भी इन्होंनें अच्छाई का साथ नहीं छोड़ा। 

आर उमारानी के विषय में बताने के पीछे हमारा उद्देश्य स्पष्ट है कि हम अक्सर समाज में स्थित ऐसी प्रतिभाओं को सामने लाते हैं, जो बिना किसी दिखावे के शांति से अपना कार्य करते हुए समाज के उत्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

ऐसे लोग असंख्य लोगों के प्रेरणास्रोत तथा मार्गदर्शक बन बिना किसी शोर शराबे और दिखावे के संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहते हैं। वर्तमान में आर उमारानी मध्य-प्रदेश टूरिज्म, भोपाल स्थित पलाश रेसीडेंसी के सदर्न स्पाईस रेस्टोरेंट में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। अपने अधिनस्थ स्टॉफ के साथ इनका सम्बन्ध परिवार के मुखिया की तरह है। इनके अधिनस्थ स्टॉफ में घनश्याम जो रेस्टारेंट के अन्दर के सभी तरह के कार्यों में दक्ष हैं। 

इनके जनरल मैनेजर अजय श्रीवास्तव जी इनके कार्य के प्रति समर्पण एवं इनकी कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हैं। तथा हर समय सहयोगात्मक व्यवहार रखते हैं। इनकी सहयोगी टीम के सदस्य घनश्याम, शबनम,पी.डी तिवारी,दिनेश लाल,दशरथ,मुकेश साहू,के. नारायणन मणी, शिव क्षेत्री, सुनील सैन, आकाश, वेश्नवी,शिवानी और कार्तिक हैं। इनके अच्छे व्यवहार जिसमें मदद करने का भाव हमेशा ही रहता है। इस अच्छे व्यवहार के कारण मध्य-प्रदेश टूरिज्म, भोपाल स्थित पलाश रेसीडेंसी का सदर्न स्पाइस रेस्टोरेंट अक्सर ग्राहकों से भरा रहता हैं जहां समर्पण होगा वहां परिणाम भी अच्छे आतें हैं। नुकसान के मामले में यदि कोविड का समय छोड़ दिया जाये तो निश्चित रूप से होटल इंडस्ट्री कभी नुकसान मैं नहीं जाती हैं।

यह ऐसा व्यवसाय है जो हमेशा से चलता आया है और चलता रहेगा।लेकिन प्रोफेशनलिज़्म के साथ यदि आत्मीयता और आत्मसम्मान का ध्यान रखा जाये तो ऐसी जगह का खाना तन को अवश्य लगता है। यह आलेख हमने मध्य - प्रदेश टूरिज्म भोपाल स्थित होटल पलाश रेसीडेंसी के सदर्न स्पाईस रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहकों के साथ बातचीत के आधार पर लिखा है। 

आर उमारानी अपनी सफलता का श्रेय अपने पति श्री रवि चंद्रन जी को तथा अपने स्टॉफ के साथ अपने जनरल मैनेजर अजय श्रीवास्तव जी एवं मैनेजिंग डायरेक्टर एस.विश्वनाथन जी को देना चाहती हैं। उनका कहना है कि इन सभी के सहयोग के बिना कार्य करना सम्भव ही नहीं है। मेरी सफलता में इन सभी का सहयोग तथा सद्भावना लगातार बनी हुई है। अगले अंक में एक नई शख्सियत के साथ आपकी अपनी दोस्त रमा निगम फिर आपसे रूबरू होंगी। तब तक के लिये इजाजत दीजिये। 

नमस्कार

श्रीमती रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल