भोले की परछाईं हो

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

भोले हम तो बंधे हुए हैं,

रिश्ते-नाते डोरी से,

चाहें कोई कितना तोड़े,

हम तो मिलते जोड़ी से।

भोले हम तो .....

पवन बहे अंधड़ -सी चाहें,

शिखरों से चट्टानें तड़कें,

मेघ गरजते हों सिहों-से,

हम तो सधे हुए भोले-से।

भोले हम तो ..

सत्य राह से कभी ना भटकें,

झूठ को हम जीवन से छिटकें,

मंजिल मिले शीर्ष की फिर-भी,

करते रहें भोले से भेटें।

भोले हम तो ...

तन को करते रहें लोह-सा,

मन को मां की ममता जैसा,

अहं की चार-दिवारी तोड़े,

मन से दिल का रिश्ता जोड़ें।

भोले हम तो ...

विपदा चाहें कैसी भी हो,

रात घनेरी छाई हो,

बस अंतस में सारे जीवन,

भोले की परछाईं हो।

भोले हम तो ...

कार्तिकेय त्रिपाठी 'राम'

गांधीनगर, इन्दौर,(म.प्र.)