दोस्त

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


मोबाइल है दोस्त बड़ा,

सबके हाथों में है सजा।

दिन-रात चैट करते देखो,

वीडियो कॉलिंग करते देखो।


आधुनिक सी है दुनिया

इसमें जगते चलते फिरते।

इमोजी में बातें करते,

लाइक के लिए अंगूठा दिखाते।


शिक्षा भी यही ,परीक्षा भी यही,

आफिस भी यही शापिंग भी यही।

खरीदो बेचो व्यापार करो,

दोस्ती भी यही प्यार भी यही।


अपनापन भी यहांँ गुस्सा भी यहांँ

वफाओ ,वादों का बाजार यहांँ।

निमंत्रण और आमंत्रण यहांँ

फोटो, सेल्फी का भंडार यहाँ।


लिखने का माध्यम बना,

काव्य पाठ का साधन बना।

नए दोस्तों से मिलवाएं,

टाइमपास खूब करवाएं।


इससे बड़ा कोई दोस्त ना पाए,

एक क्षण दूर रह ना पाए।

सोते जगते चलते फिरते

ऐसा कोई दोस्त ना पाए।


        रचनाकार ✍️

        मधु अरोरा