नारी ही है

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

नारी को नारी ही रहने दो

नारी नहीं किसी की रूप है,

वह खुद में एक स्वतंत्र व्यक्तित्व

थोड़ी छांव थोड़ी धूप है,

 किसी के साए में मत बांधो,

किसी घेरे के फंदे में मत फांदो,

किसी का रूप देने से

वह स्वतंत्र कहां रह पाएगी,

खुद में है शक्ति

किसी के आगे क्यों गिड़गिड़ायेगी,

उन्हें नारी ही रहने दो,

जगत की दुलारी ही रहने दो,

नारी नहीं किसी देवी का रूप

 उनका स्वतंत्र अस्तित्व है

स्वतंत्र है स्वरूप,

क्यों बांधना चाहते हो

किसी पौरुशिय बंधन में,

उन्हें आजाद रहने दो,

खुले गगन में उड़ने दो,

अब तक बंधन में ही

बांधकर तो रखते आए हो,

सदियों से अब तक

हर दिन सताये हो,

और कितने दिनों तक,

कितनी सदियों तक,

उनसे गुलामी करवाओगे,

बख्श दो,

न कहो देवी,

मत कहो स्वच्छंदिनी,

मत उकसाओ कि

किसी दायरे में बंधकर रह जाए

बनकर किसी की नंदिनी,

अपने नियमों में बांध

क्यों कहते हो कुलटा,

अपनी सोच बदलो

जो सोचता है हरपल उल्टा,

रहने दो आज़ाद,

वरना किसी दिन

अपने पर आ गई तो

न पैदा होगा तू, न मैं,

न रहेगी मानवीय सृष्टि।

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़