वाह (सोरठा )

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


मिलती  हमको वाह, कार्य  करें  जब  नेक  हम |

मंजिल की जब चाह,कठिन कार्य  लगता सुगम ||


सुनकर आपका नाम,वाह -वाह करते सभी |

श्रेष्ठ किया जो काम,बहुत बड़ी  यह बात है||


 सुंदर लगता गीत,वाह -वाह क्या बात है |

मिल जाये मन मीत ,जीवन के  संघर्ष में ||


मिले नयी जब राह,आगे  बढ़ते हैं कदम |

करती दुनिया वाह,देख सभी अब दंग हैं ||


आती  मन  में   बात, वाह मजा  क्या  जिंदगी |

मिली नयी सौगात, बिना कलम के तुम लिखो ||


मिलती सच्ची राह,करते श्रम  है जो सदा |

निकले उर से वाह, सतजन कहते है यही ||


करना उत्तम काम,सच्ची वाह तब मिलती |

होगा जग में नाम, अमर  सदा बनकर रहे ||


रखना मत मन चाह,काम ह्रदय से कीजिये |

मुख से निकले वाह,मिल जाती सब राह हैं ||

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कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश