शरीर के लचीलेपन को बनाए रखने में ये योगासन करेंगे आपकी मदद

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

बेहतर फिटनेस के लिए शरीर का लचीलापन बहुत आवश्यक होता है। यह आपको तेजी से चलने, झुकने, बैठने से लेकर शरीर के सभी आवश्यक कार्यों को आसानी से करने में मदद करता है। हालांकि समय के साथ उम्र बढ़ने, गतिहीन जीवनशैली, तनाव या अनुचित मुद्रा के कारण आपका शरीर लचीलापन खो सकता है। ऐसी स्थिति में आपके लिए दैनिक जीवन के कार्यों को कर पाना भी कठिन हो जाता है।

लचीलेपन की समस्या गठिया, हड्डियों-मांसपेशियों के दर्द का कारण बन सकती है, इस बारे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। योग का नियमित अभ्यास शरीर के लचीलेपन को बनाए रखने में आपकी मदद करता है। 

विशिष्ट योग पोज़ का अभ्यास करने से आपको मांसपेशियों की ताकत बनाने, तनाव या चिंता की भावनाओं को कम करने और शरीर की सहनशक्ति को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। योग के अभ्यास की आदत आपके पीठ, कूल्हों, कोर, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है। सभी लोगों को दिनचर्या में योगासनों को जरूर शामिल करने की आदत बनानी चाहिए। आइए जानते हैं कि लचीलेपन को बढ़ाने के लिए किन योगासनों के अभ्यास को फायदेमंद माना जाता है?

मार्जरी आसन योग का अभ्यास

मार्जरी आसन को कैट काऊ पोज के नाम से भी जाना जाता है। यह पीठ और पेट की मांसपेशियों-अंगों की बेहतर मालिश करने के साथ रक्त के संचार को बढ़ाने और दर्द को कम करने में कारगर अभ्यास माना जाता है। मार्जरी आसन योग का नियमित अभ्यास आपके कोर, गर्दन, कंधों और रीढ़ की गतिशीलता और लचीलेपन में सुधार के लिए भी सबसे अच्छा माना जाता है। जिन लोगों के पीठ में दर्द रहता है उनको भी इस योग से आराम मिल सकता है। 

धनुरासन योग

धनुरासन योग या बो पोज का अभ्यास शरीर की आवश्यक मांसपेशियों को फैलाने में मदद करता है जिससे बैठने-उठने की समस्या नहीं होती है। धनुरासन योग, आपकी पीठ, छाती, ग्लूट्स और पैरों में मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकती है। हालांकि जिन लोगों को गर्दन, कंधों या पीठ में दर्द या असुविधा रहती है उन्हें इसके अभ्यास से बचना चाहिए। धनुरासन योग करने के बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

हलासन योग

हलासन योग जिसे प्लो पोज के रूप में जाना जाता है यह भी शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और पूरे शरीर की स्ट्रेचिंग के लिए काफी कारगर हो सकती है। गर्दन, कंधों और रीढ़ से अतिरिक्त तनाव को कम करने में भी इसके अभ्यास को मददगार माना जाता है। पीठ से लेकर कंधे और कमर दर्द की समस्या को दूर करने के लिए इस योग के नियमित अभ्यास से लाभ प्राप्त किया जा सकता है।