याद आने लगे

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   


रिमझिम बारिश में याद आने लगे,

याद आकर दिल को सताने लगे।

दूर से ही मोहब्बत जताने लगे,

न मिलने के सौ बहाने बनाने लगे।

बूंदें  मिल धरा से हर्षाने लगे ,

प्यार के फिर वह गीत गाने लगे।

धानी चुनरी पहन इतराने लगे,

खुशियों के बादल मंडराने लगे।

रिमझिम बारिश में याद आने लगे

दिल में सोए जज्बात जगाने लगे,

वादा आने का कर मनाने लगे।

सावन में आऊंगा समझाने लगे,

लाऊंगा तोहफे फिर बताने लगे।

कजरे गजरे की बातें बनाने लगे,

झुमके चूड़ी बिंदी लाने लगे।

रिमझिम बारिश में याद आने लगे।

मिलन के ख्वाबों सजाने लगे,

बस आएंगे मन समझाने लगे।

पलकें राहों में उनकी बिछाने लगे,

तारे गिन गिन रात बिताने लगे।

दिन खुशियों के फिर आने लगे,

प्रियतम साथ मेरे मुस्कुराने लगे।

रिमझिम बारिश में याद आने लगे।


                   रचनाकार ✍️

                   मधु अरोरा