राजा (उल्लाला छंद )

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

होता राजा हैं वही,जिसको आता काज हो |

सारी सुखमय  हो प्रजा ,चलता जिनका राज हो ||

राजा मन से जानिए, करना प्यारे काम है |

जनता पूजे राज को, भजन करे निष्काम है ||

भला करे जो देश का, बोली बोले प्रेम से |

अपने सुख को त्याग कर, काम करे नित नेम से ||

राजा बनना है कठिन,करना पड़ता त्याग है |

अलख जगाता धर्म का, जनता जागे भाग है ||

खुद के दुख को भूल कर, करता जनकल्याण है |

कर्म श्रेष्ठ हो विश्व में,मिले तब परित्राण है||

कर्मठ करते राज है, बने आलसी दीन है|

मनसा वाचा कर्मणा, यही सुधारे तीन है ||

सबसे पहले हो प्रजा, देखे तब परिवार है |

सबके सुख में खो गए,भूल गए घर द्वार है ||

राजा करता न्याय जब, होता देव समान है |

पक्षपात को भूलकर, जाने सच का भान है ||

हँसी ठिठोली जोर से, करे प्रेम से बात है |

तभी सुखी वो राज्य है, राजा जागे रात है ||

सच्चा राजा है वही, देता सच का साथ है |

होती जय -जयकार है,रखे दीन पर हाथ है ||

राजा जाने धर्म ये, प्रजा रहे सुख चैन से |

खुशियाँ फैले राज्य में,नहीं अश्रु हो नैन में ||

जैसे जिसके कर्म हो, बनता राजा रंक है |

कर्मठ करता राज्य है, सुस्त गिरे सब पंक है ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश