मुद्दतों बाद पुनः आज,जब उनसे बात हुई।

मुद्दतों बाद पुनः आज,जब उनसे बात हुई।

जुबां खुली ही नहीं,आँखों से बरसात हुई।।


होके स्वच्छंद कभी,तुम्हारे साथ चलते थे।

सुनी आवाज तो स्मृतियाँ,आज पुनः ताजा हुईं।।


अपने चेहरे से जुल्फ़ों को,बार बार हटाना तेरा।

हवा के संग संग जब काली,मेघों की बरसात हुई।।


बिन तुम्हारे अब कहीं के,हम तो नहीं रहे यारा।

कुछ नई बात कहो यार,ये तो बहुत पुरानी हुई।।


स्वरचित एवं मौलिक रचना 

नाम:- प्रभात गौर 

पता:- नेवादा जंघई प्रयागराज उत्तर