कैसी है तपस्या

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   


कैसी है ये तपस्या

कैसी है साधना

लीन है मन मेरा

दिल में बसा तेरा नाम है

छवि तेरी आँखों में बसी

मन में तेरी तस्वीर रमी

यूँ तो कण कण में समाये हो

पर नजर नही आये हो

दर्शन दो मेरे घनश्याम

बस इतनी सी है आस

तोड़ सान्सारिक बंधनो को

लीन मुझ में हो जाउँ श्याम

करुणा भरी पुकार यही

चरण शरण दो घनश्याम


कवयित्री: गरिमा गौतम

पता: कोटा राजस्थान