मांग लो अपने लिए भी प्रशस्ति-पत्र..

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


कविताओं सुनों !

करो परिवर्तन स्वयं के रचे में ,


बहिष्कार करो

सम्मेलनों में बजती करतल ध्वनियों का ,

आमंत्रण दो आम आदमियत की मुस्कराहट को,


बदल डालो पर्याय

व्याकरणों के ,

स्वछंद उड़ना सीखो

साथ पतंगों के ,


कविता हो

कविता की ही तरह बनो-ठनो

मत उलझो लेखों के तर्को में ,


उठो, गढ़ो नये बिंब

नए-नए  ग्रह-नक्षत्र मांगो अपने लिए

अंतरिक्षों से ,


सुनों..

तुम भी शामिल हो

धरती, पेड़, हवा, बारिश, धूप..बनाने की प्रक्रिया में

मांग लो अपने लिए भी प्रशस्ति-पत्र 

सभ्यताओं से !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

मेरठ, उत्तर प्रदेश