"मेरी बिटिया"

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


तुम्हारे लिए होगी वो केवल देह मेरे लिए मेरी जान है।

तुम करते इस पर उस पर अश्लील टिप्पणी 

मेरे लिए वो मेरा मान है।।


 राह चलना दूभर किया उसका उसकी तकलीफ का क्या तुमको ज्ञान है?

 मैं नहीं कहती कि तुम्हारी भी बहन बेटी होगी 

क्योंकि वह भी किसी घर का अभिमान है।।


दिल रोता है मेरा ज़ार ज़ार 

जब टूट कर बिखरती वो नादान है।

बेवजह ज़माने की ज़्यादतियों को सहती 

उसकी तकलीफ से सब क्यों अंजान हैं?


उड़े वो, तय करें सफलताओं की मंजिलें 

पूरे होने दो उसके भी अरमान हैं। बस जीने दो लड़कियों को जिंदगी अपनी

 उनका भी तुम्हारी तरह ये जमीन ये आसमान है।


 स्वरचित 

ऋतु अग्रवाल 

मेरठ