हवाओं का पहलू

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

हवाएं हौसले बढ़ाती हैं

 बहती अपनी गति से

लोग देखते नुकसान हैं

ये सब का असर होता है

ठहरे हुए पत्तों को

हिला देती हैं हवाएं 

ठहरे हुए पानी को

बढ़ा देती है हवाएं

लोगों की दृष्टि है

दीये बुझा देती हवाएं

निर्जीव वस्तुएं भी

हवाओं से जीवित हैं

चलते रहो चलते रहो

कह देती हैं बहती हवाएं

आंधियों का भी क्या

ये ठहरती कहां हैं

हर वस्तु के दो पहलू

यह जुड़े हैं हर किसी से

हवाएं हिलाती डोरी हैं

मजबूत जड़ों का क्या

कहती हैं हवाएं प्रतिपल

आत्मविश्वास एक पूंजी है

दृढ़ता है जब अपने मन में

कोई हिला न सके कहते हैं

हवाओं का वह पहलू देखें

जिस पर न अंधेरा है

मन में उजाला क्या अंधेरा

दिखाने वाले कमजोर पड़े हैं

पूनम पाठक "बदायूँ "