वृक्ष का महत्व

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

रहीम के बगीचे में सेब के कई पेड़ थे। पर उसमें से दो पेड़ों पर कभी भी सेव नहीं आते थे वह पेड़ बेकार खड़े थे कई बार रहीम की पत्नी ने उन दोनों पेड़ों को काटने की बात कही। वह हर बार यही हमसे बोलती थी ऐसे पेड़ों को अपने बगीचे में जगह दे कर क्या फायदा जो फलते फूलते ही ना हो इन्हें तुम काट कर क्यों नहीं फेंकते हो।

रहीम अपनी पत्नी की बात सुनकर बोला हां तुम ठीक कह रही हो  "हांँ मैं आज नहीं कल इन पेड़ों को कल काट दूंगा" रहीम की पत्नी बोली मैंने तुम्हें कब  रोका है आज ही काट डालो इन बिना  फल देने वाले वृक्षों को।

रहीम बोला आज नहीं कल इन्हें अवश्य कटवा दूंगा।

रहीम के जाते ही दोनों सेब के वृक्ष रोने लगे ।उनकी आवाज सुनकर पास खड़े आम ,जामुन, केले ,अनार के वृक्ष बोले।

तुम दोनों क्यों रो रहे हो सेब के वृक्ष बोले भाई देखो ना मैं फलता हूं ना मैं फूलता हूंँ। इसलिए कल हमारे बगीचे का माली हमें काटकर फेंकने वाला है आज हमारा अंतिम दिन है इसलिए मैं रो रहा हूं।

दोनों सेव के वृक्ष यह कह कर चुप हो गए सारे पेड़ उनको समझाने लगे बोले तुम दोनों चुप हो जाओ। हम मालिक से प्रार्थना करेंगे और हमारा मालिक हमारी बात अवश्य मान जाएगा तुम्हारी जान भी बच जाएगी।

अगले दिन सुबह रहीम जैसे ही सेब के वृक्षों को काटने के लिए कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा सारे वृक्ष हाथ जोड़कर खड़े हो गए और कहने लगे मालिक आप इन्हें मत काटिए

रहीम बोला तुम लोग कौन होते हो मुझे रोकने वाले।

मेरा बगीचा है मैं काँटू या रखूंँ और ऐसा कह कर कुल्हाड़ी पेड़ों को काटने के लिए हाथ में उठा ली।

तभी अनार के पेड़ ने आगे बढ़कर रहीम का हाथ पकड़ लिया और बोला मालिक इनको काटने से पहले आप मुझे काटोगे। तभी सारे पेड़ एक साथ बोल पड़े हम सभी एक साथ मरना चाहते हैं हम इनके बिना जीवित रह कर क्या करेंगे।

अब रहीम तो सोच में पड़ गया।

तभी केले का पेड़ समझाते हुए बोला मालिक मेरी बात सुनिए हम चाहे फल फूल कुछ भी ना दें पर शुद्ध हवा जल और छाँव तो देते हैं। देखिए ना दुनिया में कितना अशुद्ध पर्यावरण हो रहा है।

कितना प्रदूषण बढ़ गया है कितनी तरह की बीमारियांँ होने लगी हैं जमीन  में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है शहरों में तो पानी की किल्लत होने लगी है बरसात भी समय पर नहीं हो पाती।

आम के पेड़ की बात सुनकर रहीम के हाथ रुक गए वह सोचने लगा इन पेड़ों को काटकर क्या मिल जाएगा यह पेड़ एक दूसरे की मन की व्यथा एक दूसरे से कह देते हैं पक्षियों को शरण देते हैं भोजन देते हैं रहीम ने कुल्हाड़ी एक तरफ रख दी और बोलने लगा तुम सब ने मेरी आंँखें खोल दी आगे से मैं कभी किसी पेड़ को कटने नहीं दूँगा और लोगों से भी वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करूंँगा वृक्ष लगाने से हमारी पृथ्वी को हरियाली मिलेगी और सारी बीमारियां दूर होने लगेंगी

हर व्यक्ति को अपने जन्मदिन पर या किसी विशेष दिन पर कम से कम साल में एक वृक्ष तो लगाना ही चाहिए ताकि आने वाली संतति को स्वच्छ हवा और पानी की दिक्कत ना हो।

हरा भरा होगा देश बीमारी से मुक्त रहेगा देश।

स्वच्छ हवा फिर हमें मिलेगी सुंदर होगा हमारा देश।

               रचनाकार ✍️

               मधु अरोरा

.