व्यस्त (उल्लाला छंद )

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

जो कहता फिरता बात ये,  नहीं उसे आराम है |

अब व्यस्त बहुत है जिंदगी, कर्म करे निज धाम है ||

जो व्यस्त समय को साधता, करता कर्म महान है |

वह जीवन के संग्राम में ,पाता सबसे मान है ||

व्यस्त मनुज है काम में, करता लोभ अपार है |

भजन करो तुम ईश का,नश्वर यह संसार है ||

भूला है सत्कर्म को, इतना मानव व्यस्त है |

करे संपत्ति लालसा, बहुत काम से पस्त है ||

मनुज विचारे मन सदा, वैभव मिले अपार है |

दिया जन्म जिसने उसे, भूला उसको प्यार है ||

चरण स्वर्ग है मातु के, मानव भूला आज है |

कहता फिरता व्यस्त है,करता अपने काज है ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश