महामहिम हमारा अपराध क्या है.. ? क्या अब हमें जनजाति का दर्जा मिल पाएगा

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

सदियों से जनजाति का दर्जा पाने के लिए उपेक्षित पाठा के आदिवासी

चित्रकूट जिले में लगभग एक लाख की आवादी वनवासी , आदिवासी कोलों की है । 

अपने वनवास काल में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने 11 वर्ष से अधिक का समय चित्रकूट के इन्हीं आदिवासी कोलों के पूर्वजों के साथ बिताया होगा। आज सर्वाधिक गरीबी, शोषण, उत्पीड़न का दंश यही कोल परिवार "अमृत महोत्सव पर्व" वर्ष में भी झेलने को मजबूर हैं । 

उ0 प्र0 के अलावा पूरे देश में कोल, मवैया जनजाति की श्रेणी में हैं । 

सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ भी पा रहे हैं । साक्षरता दर भी अच्छी है । सरकारी सेवाओं में भागीदारी भी है । उ0 प्र0 में कोल आदिवासी परिवारों की जनसंख्या पांच लाख के आस - पास होनी होगी । 

आज यह समूह अनुसूचित जाति में है यह समूह सबसे पीछे है क्योंकि सामाजिक , राजनैतिक चेतना का अभाव है । इनकी कोई पैरवी करने वाला भी नहीं है । चुनाव काल में सबने सदैव जनजाति का दर्जा दिलाने का वचन दिया है किन्तु ऐसा हो नही पाया । चित्रकूट पवित्र तीर्थ स्थल है । आये दिन श्रीराम कथाओं के विराट आयोजन होते हैं । कोलों की सेवकाई का वर्णन किया जाता है । पूज्य जगत गुरुओं का यहाँ निवास है , प्रवास है , प्रभाव भी है, फिर भी राष्ट्र पुरुष श्रीराम के इन प्रिय वन जनों की स्थिति - परिस्थिति सुधार हेतु उन्हें जनजाति का दर्जा दिलाने का पवित्र कार्य पूरा नहीं हो पा रहा । शायद इन कोलों की दीनता पर दया करने का भाव सूख गया है । कोल आज जानना चाहते है, हमारा अपराध क्या है..... ? 

अब महामहिम राष्ट्रपति के रूप में महामहिम द्रोपदी मुर्मू का सौभाग्य से शुभागमन हुआ है । 

क्या उ0 प्र0 के कोल आदिवासी इस स्वर्णिम काल में जनजाति का दर्जा पा सकेंगे..... ? .........शायद नहीं ।

क्योंकि उनकी स्थिति- परिस्थिति पर चिन्तन करने वाला कोई संवेदनशील सत्ता प्रतिष्ठान नहीं है । महामहिम की जीत पर पाठा के कुछ गांवों में जिनके पास जानकारी थी , अपनी खुशी का प्रकटीकरण इस विश्वास के साथ किया है कि शायद उन्हें अब जनजाति का दर्जा मिल जाये....... ?