गीत जिन्दगी का

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


ये गीत जिंदगी का तू गुनगुना के देख।

मिलता है हौसला फिर तू मुस्कुरा के देख।


तुझको शिकार करने का शौक बहुत है।

ख़ुद भी तो कभी सीने पे तीर खा के देख।


गुम होंगें सभी रौशनी में साए की तरह।

मुश्किल में दोस्तों को भी आज़मा के देख।


सूरज की ओर तकना मुश्किल नहीं है कुछ।

उन आंखों की चमक की तू ताब ला के‌ देख।


वो दिल से घर जुड़े हैं तो हर आह सुनेंगे।

आएंगे वो ‌तड़पकर बस तू बुला के देख।


मुक्ता शर्मा मेरठ

मौलिक एवं ना