रीढ़ की दिक्कतों को इन योगासनों के अभ्यास से मिलेगा लाभ


 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

शरीर को सीधा रखने, झुकने और दैनिक जीवन के अन्य आवश्यक कार्यों को करते रहने के लिए रीढ़ की हड्डी का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक माना जाता है। हालांकि गड़बड़ लाइफस्टाइल के चलते पिछले कुछ वर्षों में रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं के मामले काफी बढ़ गए हैं। विशेषज्ञ इसके लिए सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक के तौर पर देखते हैं। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि जीवनशैली की गतिहीनता आपमें कई तरह के स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। रीढ़ की हड्डी की समस्या भी इसका एक उदाहरण है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप दिनचर्या में रोजाना योगासनों को शामिल करते हैं तो हड्डी और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं जो लोग पहले से ही रीढ़ की समस्याओं के शिकार हैं उनके लिए योगासनों का अभ्यास करना विशेष लाभप्रद हो सकता है। आइए जानते हैं कि दिनचर्या में किन योगासनों को शामिल करने की आदत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है?

भुजंगासन योग

रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ लचीलेपन को बढ़ाने और कमर-गर्दन के दर्द को कम करने के लिए भुजंगासन योग के अभ्यास की आदत आपके लिए विशेष लाभप्रद होती है। भुजंगासन योग को विशेषज्ञ शरीर के पिछले हिस्से के अंगों के लिए काफी फायदेमंद अभ्यास के तौर पर देखते हैं। आपकी छाती, कंधे और पेट की मांसपेशियों के बेहतर स्ट्रेचिंग और स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए इसका नियमित अभ्यास किया जाना चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ भुजंगासन योग आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी कारगर योगाभ्यास माना जाता है। 

कैट काऊ पोज का अभ्यास

कैट काऊ पोज या मार्जरी आसन को रीढ़ की समस्याओं में काफी फायदेमंद माना जाता है। रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने से लेकर लचीलेपन को बढ़ाने और रक्त के संचार को ठीक बनाए रखने के लिए रोजाना इस योग का अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। मार्जरी आसन आपके धड़, कंधे और गर्दन की बेहतर स्ट्रेचिंग करने के साथ शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करने में आपके लिए लाभकारी है। 

अधोमुख शवासन योग

पीठ, कमर और रीढ़ से संबंधित दिक्कतों को दूर करने के लिए विशेषज्ञ अधोमुख शवासन योग के नियमित अभ्यास की आदत को लाभदायक मानते हैं। डाउनवर्ड फेसिंग डाग पोज रीढ़ के लचीलेपन को बढ़ाने और कमर की समस्याओं को दूर करने में आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण लोगों में शरीरिक असंतुलन काफी बढ़ गया है, ऐसे में इस योग के नियमित अभ्यास की आदत समस्याओं को दूर करने में आपके लिए सहायक हो सकती है।