तुमसे मिलूं

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


यही कामना है तुमसे मिलूं

जल में जलज के जैसे खिलूं।


मैं हूं ज्योति मंदिर की तेरे

बने प्राण लौ और मैं जलूं।


यही कामना है तुमसे मिलूं।।

जल में जलज के जैसे खिलूं


यू साथ तेरा मिलता रहे 

घन बीच नखत खिलता रहे।


मुझमें है तू ही समाया हुआ 

मैं प्रेम हिम प्रेम में ही गलूं।


यही कामना है तुमसे मिलूं

जल में जलज  के जैसे खिलूं।।


अंजनी द्विवेदी (काव्या)

देवरिया,उत्तर प्रदेश