वास्तु शास्त्र : पढ़ने से जी चुराता है बच्चा तो अपनाएं यह उपाय

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

बच्चों का मन चंचल होता है और एकाग्रता की कमी के कारण वह अपनी क्षमताओं का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पाते। बच्चों की पढ़ाई भी इसी कारण प्रभावित हो सकती है। ऐसे में माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से बच्चों का मन भटकाव की स्थिति से दूर होता है और उनमें एकाग्रता बढ़ सकती है। आइए जानते हैं सकारात्मक परिणाम देने वाले इन उपायों के बारे में। 

सबसे पहले बच्चे जहां पढ़ाई करते हैं उस स्थान या कमरे पर विशेष ध्यान दें। जहां बच्चा पढ़ता है वहां बिल्कुल भी गंदगी नहीं होनी चाहिए। बच्चों के स्टडी रूम में ज्यादा सामान भरा हुआ नहीं होना चाहिए। बच्चों के कमरे में शीशा ऐसी जगह न लगा हो जहां पुस्तकों पर उसकी परछाई आती हो। स्टडी रूम में हरे रंग के पर्दे लगाएं, इससे बच्चों में एकाग्रता बढ़ती है। बच्चे के रूम या स्टडी टेबल पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र लगाएं। दौड़ते हुए घोड़े, उगते हुए सूर्य का चित्र भी लगा सकते हैं। स्टडी रूम में हल्का हरा या पीले रंग का प्रयोग करें। कमरे में चटक रंग बच्चे का मन पढ़ाई से भटका सकता है। 

बच्चों को मां सरस्वती और भगवान श्रीगणेश के बीज मंत्रों का जाप कराएं। बच्चों के स्टडी कक्ष के गेट पर नीम की कुछ डालियां बांध दें। इससे स्टडी रूम में सकारात्कमक और शुद्ध हवा प्रवाहित होती है। बच्चे के माथे पर केले के वृक्ष की मिट्टी का तिलक लगाएं। बच्चों से धार्मिक पुस्तकों, कलम व शिक्षा सामग्री का दान कराएं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वह अपनी पुस्तकों में मोर पंख रखें। बच्चों को प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप कराएं। बच्चे को हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख कर पढ़ने बैठाएं। हर गुरुवार मंदिर में जाकर भगवान श्री हरि विष्णु के समक्ष घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें।