पूज्य पिताजी

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

सघन वृक्ष लगता हमें,

पिता आपका प्यार।

छाया देकर ही किया,

जीवन भर उपकार।।

नेक राह पर हम चलें,

देते हैं उपदेश।

होगा खुद गढ़ना हमें,

जीवन का परिवेश।।

बिना कहे ही जानते ,

मन की सारी बात।

मात-पिता संतान हित,

जागें सारी रात।।

हरि सुमिरन करके सदा,

करना अपने काम।

पिता सदा कहते यही,

बनना तुम निष्काम।।

शुभाशीष है आपका,

सदा हमारे साथ।

संकट की घड़ियांँ टलीं,

रखा शीश पे हाथ।।

भूले से मत कीजिए,

मात-पिता अपमान।

जीवन दाता है वही,

रखिए इसका ध्यान।।

जीवन में जो कुछ मिला,

दिया उन्हीं का जान।

कितना भी ऐश्वर्या हो

मत करना अभिमान।।

वीनू शर्मा

जयपुर राजस्थान