गंगा तुम बहती रहना

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  


शुचि,सुभग,सुवासित ध्रुवनन्दा,

निर्मल,निर्झर,निराली गंगा,

पाप पापियों के धोती रहना,

गंगा तुम बहती रहना...


पतित पावनी पुष्कर गंगा,

श्वेत,शुभी,शुभंकर गंगा,

मृदु,मंदाकिनी,कल्लोलिनी,

भागीरथ तप का मान धरना,

गंगा तुम बहती रहना...


घाट,घटक,घर साजे,

तीर तुम्हारे तीर्थ विराजे,

गर्वित गंगोत्री उद्गमस्थली,

हर्षित हरिद्वार पग धरना,

गंगा तुम बहती रहना...


गंगा गरिमा अति मनभावन,

सिद्ध सुरसरि,सुरनदी पावन,

हिन्द हिमालय की प्रतिष्ठा,

अजर,अभय,अक्षय वर देना

गंगा तुम बहती रहना...


कलुषित कपटी कुटिल प्राणी,

मत मैली करो गंगा अभिमानी,

अमर,अजय इतिहास की कहानी,

विष्णुपदी विश्व कल्याण करना,

गंगा तुम बहती रहना...


             रीमा सिन्हा

       लखनऊ-उत्तर प्रदेश