"बस मन को मुस्कुराना चाहिए"

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   

इस दुनिया में हजारों मनोरंजन एप और मनोरंजन साइड हैं जहां पर हम अपने मन को बहला सकते हैं या फिर यूं कहें बहलाने  की कोशिश कर सकते हैं ..पर यह सुनिश्चित नहीं है कि हम कितने प्रतिशत अपने उद्देश्य में सफल हो पाते हैं पर दुनिया में सारे मनोरंजन के साधन मनुष्य के मनोरंजन के लिए ही बने हैं फिर भी मनुष्य के अंदर मानसिक तनाव और अकेलापन है कि वह मन से जाता ही नहीं है। हम अपने मन में अंधेरा पन और अकेलेपन से जूझते रहते हैं एक अदद सच्ची मुस्कान, आत्मिक प्रसन्नता के लिए तरसते रहते हैं।

आज के समय में भौतिक यंत्रों के मामले में हम लोग बेहद अमीर हो चुके हैं हर घर में भांति भांति के सुख के साधन, खाने पीने का बेहिसाब सामान ,रहने के लिए सबको अलग-अलग कमरे मिल गए हैं पर क्या... यह सब चीजें मानसिक शांति और मन की खुशी के लिए पर्याप्त हैं ?? क्या इनसे हमें आत्मिक शांति का अनुभव हो सकता है ??यदि हां तो आज भी क्यों .. मनुष्य का मन उद्वेलित और अशांत है !!!क्यों नहीं हम सच्ची प्रसन्नता का अनुभव कर पाते!!! क्यों सभी अकेलेपन निराशा का अनुभव कर रहे हैं!!

दरअसल हम लोगों ने खुशी पाने का मार्ग ही गलत अपना लिया हैं मन को खुशी ना तो किसी मनोरंजन साइड पर मिल सकती है ...ना किसी लाफिंग क्लब में जाकर मिल सकती है.. और ना ही दुनिया के ढेरों भौतिक संसाधनों में मिल सकती है!!!

इस आधुनिक युग में हमें एक बार फिर से गहन विचार विमर्श करने की जरूरत है कि आखिर हमारे हृदय को सच्ची प्रसन्नता मिलती किससे है !!!

दरअसल मात्र हमारा यह भ्रम है कि भोग विलास के संसाधनों को जुटाने से हम खुश हो सकते हैं या बहुत सारा धन एकत्र करके हम प्रसन्न हो सकते हैं या किसी मनोरंजन साइट पर जाकर हम अपने मन का अकेलापन दूर कर सकते हैं यदि मन का अंधेरा पन और अकेलापन दूर करना है और सच्ची मुस्कान पानी है तो बहुत सारा धन नहीं एक सच्चा मन कमाने की जरूरत है अगर सच में मन को प्रसन्नता देनी है तो कभी किसी भूख से व्याकुल इंसान को भरपेट भोजन करा कर देखिए ..मन जो आनंद का उत्सव मनाएगा कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते हम अपना बेशकीमती समय जो मनोरंजन के साधनों में खर्च करते हैं उस समय को यदि अपने घर परिवार के लोगों की भावनाएं समझने में खर्च करें तो अकेलेपन का प्रश्न ही खत्म हो जाएगा.. जब हमारे आंखों से आंसू निकलते हैं तो किसी मनोरंजन साइड से निकलकर कोई आप के आंसू नहीं पोछ सकता उसके लिए अपने लोगों की जरूरत पड़ती है।

कभी भी यह मत सोचिए कि किसी ने हमारे साथ बुरा किया तो हम क्यों अच्छा करें ..सर्प और चंदन के बारे में सभी ने सुना होगा सांप चंदन के पेड़ से लिपटे रहते हैं पर सांप अपना  विष नही छोड़ता है और ना चंदन अपनी शीतलता का त्याग करता है कोशिश कीजिए कि जिंदगी में हम चंदन बन सके और सब को शीतलता प्रदान कर सके यदि हम किसी के जीवन में खुशियों के रंग भरेगे  तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कि हमारा हाथ रंग से वंचित रह जाए इसीलिए जहां तक हो सके सबको प्रसन्नता बांटते रहिए.. उसके बाद ना किसी मनोरंजन  की जरूरत है और ना ही अकेलेपन और अवसाद के श्राप से जूझना पड़ेगा...अपने मन के मुस्कान के लिए मुस्कान बांटना ही प्रकृति का सबसे उत्तम प्रबंधन है ।

रेखा शाह आरबी

बलिया (यूपी)