विनाश को क्यों न्योता दे रहा मानव

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   


पांच तत्वों से बना शरीर हमारा

पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश

प्रकृति से कर रहा छेड़छाड़

न्यौता दे रहा मानव कर रहा विनाश


हरे भरे जंगल थे कभी दिए सब उजाड़

पर्यावरण का संतुलन मानव ने दिया बिगाड़

दिनों दिन घट रहे पेड़ पौधे और वनस्पति

जनसंख्या का कर दिया खड़ा पहाड़


जिन पेड़ों पर बैठ कर पक्षी चहचहाते थे

अपनी मधुर आवाज में सुरीले गीत गाते थे

मिट्टी निकाल दी पेड़ गिरा दिए

जो जीवन में हमारे बहुत काम आते थे


आज मजबूर धरा कर रही हाथ जोड़ कर पुकार

मत खेलो मेरे जज़्बातों से करो मुझ पर उपकार

जीवन का हर सुख दिया मैंने तुझे ए मानव

फिर क्यों कर रहा मेरे सीने पर वार पर वार


तेरी औकात नहीं है मुझसे भिड़ने की मूर्ख इंसान

मुझसे छेड़ कर क्यों अपने लिए आफत को बुला रहा

इतना मैं तुझको समझा रही मत कर मुझे परेशान

पर तेरी समझ में आखिर यह क्यों नहीं आ रहा


रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं

जिला बिलासपुर हि प्र