एंटी करप्शन टीम ने कानूनगो को किया गिरफ्तार

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

-अपने ही निर्णय का अनुपालन नहीं करा पाते अधिकारी

बांदा। एक बार फिर सदर तहसील में पनप रहे भ्रष्टाचार की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने एक कानूनगो को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़कर गिरफ्तार कर लिया। एंटी करप्शन टीम उसे कोतवाली ले गई जहां पर कानूनी कार्यवाही अंजाम देने का काम किया जा रहा है। सदर तहसील में रोज अपने-अपने कामों के लिए एसडीएम से लगाकर तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल के फरियादी चक्कर काटते रहते हैं लेकिन इनकी समस्याओं का निस्तारण करने के वास्ते कार्यवाही कम बल्कि चौढ़ाना दो और काम लो का नारा इख्तियार कर फरियादियों को परेशान किया जाता है। 

हदबंदी के मुकदमों का निस्तारण छह महीने पहले से लेकर एक साल पहले तक के दर्जनों प्रमाण कानूनगो के बस्ते में बंधे रखे हैं। जिनका अनुपालन इसलिए नहीं हो पाया कि उनके मन मुताबिक उन्हें रिश्वत नहीं मिली। लेकिन नौकरशाही ने अपने ही आदेश का अनुपालन कराना कभी भी वाजिब नहीं समझा। परिणामस्वरूप पीड़ित पक्ष की पैरवी पर एंटीकरप्शन टीम ने आकर सदर तहसील के बाहर फल और जूस की एक दुकान में उक्त कानूनगो होरीलाल को 20 हजार रुपये की रिश्वत भेंट की। चूंकि रिश्वत का यह पैसा एंटी करप्शन टीम का होता है इस आरआइ ने उस पैसे को हाथ लगाया और जेब में डाला कि एंटी करप्शन टीम ने उसको उठाकर फुटबाल की तरह अपनी गाड़ी में धरा और कोतवाली लेकर चले गए। 

अपनी-अपनी हदबंदी का फैसला अपने सीने से लगाए दर्जनों लोग रोजाना उपजिलाधिकारी से लेकर तहसीलदार के दरवाजे प्रार्थनाएं करते सुने व देखे जाते हैं। लेकिन इन प्रार्थनाओं का भी कोई असर नहीं होता। यदि असर होता होता तो शायद एंटी करप्शन टीम को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार करने का अवसर न मिला होता। हालांकि जानकार सूत्र बताते हैं कि एंटी करप्शन टीम अभी तहसीलदार बांदा से लिखित अनुमति लेनी पड़ेगी तभी कानूनगो को जेल भेजा जाएगा। आज से पांच साल पहले इसी मई महीने में सदर तहसील के एक बाबू को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा था। जानकारों ने बताया कि इस कानूनगो का वेतनमान 90 हजार रुपये है। ऐसे ही कमाउ पूतों को बांदा सदर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया जाता है। जारी सर्किल में मूल तैनाती होरीलाल की थी लेकिन बांदा सदर का अतिरिक्त प्रभार भी इन्हें सौंप दिया गया था।