नवरात्रि में करें कामाख्या देवी के दर्शन, जानिए यहां से जुड़ी हैं दिलचस्प कहानी

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   

असम में नीलाचल पहाड़ी की चोटी पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां हैं। इस मंदिर में देवी कामाख्या की योनि की पूजा की जाती है।  ऐसे में जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें- 

नाव की आकार में बने इस मंदिर को तीन मेजर चैम्बर में बांटा गया है, जिसमें से एक हिस्से में साधारण भक्तों की एंट्री नहीं है। इसी के साथ बीच वाले हिस्से में देवी की एक मूर्ती है, जिसे बाद में यहां पर रखा गया है। इसी के साथ यहां की दीवारों पर नारायण और कुछ दूसरे देवी देवताओं की मूर्ती है।  वहीं तीसरा हिस्से को गूफा के तरीके से बनाया गया है जहां पर कोई तस्वीर वगैराह नहीं है। यहां पर ही देवी की योनि को पूजा जाता है। 

क्या है इतिहास 

इतिहास के मुताबिक मां सती ने भगवान शिव से उनके पिता दक्ष के खिलाफ जाकर शादी की थी। जिसके बाद एक बार राजा दक्ष यज्ञ कर रहे थे, लेकिन उन्होंने सती और शिव को इसके लिए नहीं बुलाया था। जिसकी वजह से सती उदास हो जाती है, और फिर भी अपने पिता के घर चली जाती हैं। जब वह वहां पहुंचती है तो उनके पिता शिव की बेइज्जती करने लगते हैं, जिसे सती बर्दाश्त नहीं कर पाती और फिर वह यज्ञ की आग में कूद जाती है। इस बात की खबर जब शिव को लगती है तो वह गुस्से में आ जाते हैं। फिर सती के शरीर को हाथों में लेकर शिव तांडव करने लगते हैं।  ऐसा देख सभी चीजों को बचाने के लिए भगवान विष्णू अपने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल करते हैं और इसकी मदद से सती के शरीर के टुकड़े कर देते हैं। ऐसे में सती के शरीर के टूकड़े अलग-अलग जगहों पर गिरते हैं जो आज शक्ति पीठ के नाम से जाने जाते हैं। कामाख्या देवी मंदिर में सती की योनि गिरी थी।  

तरह-तरह की होती है पूजा

यहां पर सितंबर-अक्टूबर में आने वाली नवरात्रि के दौरान दूर्गा पूजा होती है। वहीं अंबुवासी पूजा को भी काफी खुशी से मनाया जाता है, दरअसर हर महीने ये मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है, ऐसी मान्यता है कि इन तीन दिन में देवी के पीरियड्स आते हैं। चौथे दिन इस मंदिर को खोला जाता है और उसी दिन ये पूजा होती है। पोहन बिया भी काफी धूम धाम से मनाया जाता है। पौसा के महीने में सिम्बोलिक शादी की जाती है देव कामेशवार और देवी कामेशवरी की। मांडनडियोल चैत्र के महीने में यहां पर कामदेव और कामेसलरा की स्पेशल पूजा की जाती है।