वास्तु टिप्स: जानिए नवरात्रि व्रत दौरान कहां और किस चीज का जलाएं दीपक ?

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

नवरात्रि दौरान मां दुर्गा के सामने दीपक जलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि देवी मां के सामने दीपक जलाने से जीवन में  प्रकाश फैलता है। इस दौरान कुछ लोग माता रानी के सामने अखंड दीपक स्थापित करते हैं। वहीं कई लोग सुबह-शाम दीपक जलाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इस दौरान दीपक कहां और कैसा जलाना चाहिए? चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में दीपक से जुड़े कुछ वास्तु टिप्स बताते हैं...

कहां और किस चीज का हो दीपक?

आप नवरात्रि व्रत दौरान देसी घी या तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं। वास्तु अनुसार, घी का दीपक हमेशा माता रानी के दाहिनी हाथ और तिल के तेल का दीपक उनके बाएं हाथ की ओर रखना चाहिए। घी का दीपक देवी-देवताओं को समर्पित होता है और तिल के तेल का दीपक मनचाहा फल पाने के लिए जलाया जाता है। आप अपनी इच्छा के मुताबिक 1 या 2 दीपक जला सकती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर के वास्तु का अग्नि तत्व मजबूत होने में मदद मिलती है।

ऐसी हो दीपक में बत्ती

अगर आप माता रानी के सामने ज्योत जला रहे हैं तो ध्यान रखें कि घी के दीपक में सफेद खड़ी बत्ती डालें। साथ ही तिल के तेल वाले दीपक में लाल और पड़ी बत्ती डालें।

दीपक जलाते समय इस मंत्र का करें जाप

किसी भी देवी-देवताओं की पूजा आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। इसलिए आप भी मां दुर्गा के सामने दीपक जलाने के बाद आरती करके उन्हें भोग लगाएं। अगर आप विधि पूर्वक पूजा कर रही हैं तो इसके बाद माता रानी के मंत्र का उच्चारण करें। मान्यता है कि इससे देवी मां की असीम कृपा बरसती है।

मंत्र-

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:।

दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।।

शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां।

शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।।

मंत्र का अर्थ

‘शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु की बुद्धि का नाश और उनपर विजय दिलाने वाली दीपक की ज्योति को हम नमस्कार करते हैं।’

इस बात का रखें ध्यान

अगर आपने व्रत रखा हैं तो देवी मां को भोग लगाएं। फिर उस भोग को प्रसाद के तौर पर खाकर ही किसी अन्य चीज का सेवन करें।