माँ शैलपुत्री कृपा-प्रसाद

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


चैत्र नवरात्रि,है माँ की,

माँ शैलपुत्री की आराधना,

सती,जो जन्म लें पार्वती

रुप,करें उनकी अर्चना।


शैलपुत्री-दया से होता,

जन-मन शीर्ष स्थिर,

माँ सदा रखती, हर

सत्व-बुद्धि को उजागर।


माँ ही साधती हैं,मन का

जगत से संपर्क-सूत्र,

भाव-पूजन से उनके,

होता मन आधार-पवित्र।


गृह उनका  हिमालय,

वृषभ पर हैं सवार,

दाहिने हाथ है त्रिशूल,

देता उत्तम विचार।


धर्म, अर्थ, मोक्ष  के

संतुलन का शिक्षण,

वाम हाथ कमल, मन 

से हो जग में बड़े चिंतन।


रहते स्थूल जग में हम,

मन सोचे उससे परे,

जन-मन शुभ संस्कार,

संग सार्थक  विचारें।


@ मीरा भारती,

पुणे, महाराष्ट्र।