भजन

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क  

चरण में शरण,हमको दे दो प्रभु।

ये जीवन अधूरा,तुम बिन प्रभु।।

             चरण में शरण-----

हमें चाहिए ना,धन और दौलत।

हमें चाहिए ना,दुनिया कि रौनक।।

हमें अपने चरणों में,स्थान दे दो प्रभु।।।

             चरण में शरण------

तुम्हारे बिना प्रभु,कुछ अच्छा लगे ना।

तुम्हारे शिवा कोई,और प्यारा लगे ना।।

तुम्हारे शिवा कोई,अब चाहत नही प्रभु।।।

             चरण में शरण-------

खुशी चाहे गम दो,सब स्वीकार है।

तुम पर प्रभु ये,तो जीवन निसार है।।

ये तन मन जीवन,सब तुम्हारा प्रभु।।।

           चरण में शरण--------

ये संसार सारा,तुम्हारा प्रभु है।

इस जगत के स्वामि,आप प्रभु है।।

मेरे अधरों पे नाम,सदा तुम्हारा प्रभु।।।

          चरण में शरण--------

स्वरचित एवं मौलिक रचना 

नाम:- प्रभात गौर 

पता:- नेवादा जंघई प्रयागराज उत्तर प्रदेश।