तन्हाई का आलम

                                        

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   


आज हुआ एहसास,

नैना ढूंढ रहे तुम्हें जल्दी आ जाओ न पास।


तुम्हें याद मैं पल पल करता हूँ,

आजकल तन्हा जिया करता हूँ।


तुम बिन दिन भी अंधेरी रात सा लगता है,

मन को कुछ अच्छा न लगता है।


दिल घबराए चैन न पाए,

अतुल भावुक जज़्बाती हो जाए।


तुम बिन घर लगे जैसे बेघर, 

तुमसे ही तो चहके महके ये आँगन घर।


अतुल पाठक

हाथरस (उत्तर प्रदेश)