फिर.......

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


बेटी हो तुम इस घर की

बेटी बन तुम उस घर रहना।

पर उठे हाथ तुझ पर कभी

तो चंडी रूप धर लेना ।

आभूषणों के लोभ में

तुम कभी मत फसना ।

भ्रम जाल है यह जीवन के

इन पर गर्व नहीं करना ।

सुंदर हो तो सुंदरता का

घमंड कभी मत करना।

देख आईने में स्वयं को

तन  पर कभी मत रीझना ।


बेटी हो तुम इस घर की

बेटी बन तुम उस घर रहना।

भूख मिटाना अग्नि से सबकी

पर खुद अग्नि में मत जलना ।

आदर श्रद्धा रखना सभी में

पर स्वाभिमान स्वयं  का मत खोना।

कोमलंगी हो तुम पर

कमजोर कभी मत दिखना ।

हरदम पुष्प बन महकना

पर वज्र बनकर रहना ।

अंतिम सीख है यह मेरी तुम्हें

नारी हो नारी सी रहना ।

पर नारी सी मत दिखना ,

जले आग दहेज की तो,

फिर.........…....।


कवयित्री:-गरिमा राकेश गौतम

पता:-कोटा राजस्थान