पानी रे पानी...

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

पानी रे पानी तेरा रुप इस प्रकार !

तू ही जीवन , तू ही जीवन का आधार !!

आसमान से गिरे तो बारिश बन जाये !

आसमान के ओर उठे तो भाप कहलाये !!

अगर ज़मकर गिरे तो ओले कहलाये !

अगर गिरकर ज़मे तो बर्फ के गोले बन जाये !!

पानी रे पानी .....

तू ही जीवन ....

फूल पर हो तो ओस कहलाये !

फूलों से निकले तो इत्र बन जाये !!

जमा हो जाये तो झील बन जाये !

बहने लगे तो नदी कहलाये !!

पानी रे पानी ......

तू ही जीवन ......

सीमाओं में रहे तो मस्त जीवन बन जाये !

सीमायें तोड़ दे तो प्रलय जीवन बन जाये !!

आँखों से निकले तो आँसू बन जाये !

शरीर से निकले तो पसीना बन जाये !!

पानी रे पानी ....

तू ही जीवन ......

गंगा में बहे तो गंगाजल बन जाये !

प्याले में छलके तो ज़ाम कहलाये !!

प्रभु के चरणों से छुकर निकले तो ,

चरणामृत बन जाये !

मानव जीवन के लिये अमृत बन जाये !!

पानी रे पानी तेरा रुप इस प्रकार !

तू ही जीवन , तू ही जीवन का आधार !!

स्वरचित एवं मौलिक 

मनोज शाह मानस 

मो.नं.7982510985

manoj22shah@gmail.com