वाह! देशभक्ति का ऐसा जुनून जो धूल फांकती शहीद की प्रतिमा को कर रहा छत‌ देने की कोशिश

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

गौरीशंकर पाण्डेय सरस

सुबेदार यादव के समाज सेवा की हो रही तारीफ

जखनियां/गाजीपुर। अगर आदमी में  कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो और हौसले की उड़ान तो बेशक कामयाबी की मंजिल दूर होती हुई भी करीब नजर आती है।ऐसा होने से  जहां स्वप्न को  पंख लगता है वहीं समाज में जागरूकता और सुखद संदेश भी जाता है। ऐसा नहीं है की यह सब एक ही  बार में  हो जाता है  बल्कि यह कई बार के कठिन त्याग और कड़ी मेहनत के परिणाम स्वरूप हासिल होता है। तकरीबन एक सौ पच्चीस दिन पहले एक पढ़ा लिखा युवक एनसीसी कैडेट्स अपने साथी के साथ वाराणसी के अदमापुर (महनाग)से चलकर परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के गाजीपुर स्थित पैतृक गांव धामूपुर आया था।नाम था सुबेदार यादव। उम्र करीब उन्नतीस साल।

हमीदधाम पहुंच कर शहीद पार्क में लगी शहीद और शहीद बीबी की छत विहिन प्रतिमा को गौर से देखा तो हृदय द्रवित हो गया। शीशा जार के अभाव में धूल फांकता शहीद का पैटनटैंक उपेक्षा का अहसास कराया। सुबेदार यादव ने उसी दम निश्चय किया कि अपने प्रयास से समाजसेवा के नाम पर देशभक्त हमीद की प्रतिमा पर छत का निर्माण कराएंगे।उसी संकल्प साधना के क्रम में पिछले दस दिनों से प्रशासनिक अनुमति प्राप्त कर पार्क अपने एक अदद सहयोगी साथी के साथ जमे हुए हैं। मौके पर छत के पहले मजबूत पीलर वास्ते बालू सीमेंट और कंक्रीट उपलब्ध थे।पार्क की साफ सफाई करने लगे हुए थे। सुबेदार यादव से जब प्रखर पूर्वांचल ने समाज सेवा के बावत जानकारी चाही तो बताया कि समाज सेवा का भाव तो मेरे अंदर बचपन से ही था। 

परन्तु रफ्तार एनसीसी कोर्स एवं इंजीनियरिंग करने के बाद बढ़ी। सीधा सौम्य विचार के धनी सुबेदार यादव की सामाजिक उपलब्धि किसी परिचय का मोहताज नहीं है।बात चाहे वी०एच०यू०ट्रामासेंटर स्थित परिसर में टीनशेड अनुदान की हो अथवा खुद के गांव में स्थापित वृहद व्यायाम शाला की, इसके अलावा बेजुबानों के प्रति मानवीय आत्मीयता की बात करें अथवा आदिवासी समाज में शिक्षा की लव जगाने की सबके सब से मिसाल हैं। यहां तक की गरीबों के आर्थिक सहायता को खुद की बाईक गिरवी रखना,और देश की आधी आबादी (नारी)समाज के प्रशिक्षण वास्ते अपना घर निशुल्क दान में देना हैरतअंगेज कारनामे है। गौरतलब हो कि सुबेदार यादव के जेहन में समाज सेवा सर्वोपरी है।