शीतला अष्टमी कल, गोधूलि मुहूर्त में करें पूजा

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

इस साल शीतला अष्टमी 25 मार्च, शुक्रवार को है। इसे बसौड़ा पूजा भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला माता की पूजा हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की जाती है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन लोग माता शीतला को बासी खाने का भोग लगाते हैं। बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। शीतला अष्टमी को ऋतु परिवर्तन का संकेत भी माना जाता है। क्योंकि इस दिन के बाद से ग्रीष्म (गर्मी) ऋतु शुरू हो जाती है और गर्मियों में बासी भोजन नहीं खाया जाता है।

शीतला अष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त-

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - मार्च 25, 2022 को 12:09 ए एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त - मार्च 25, 2022 को 10:04 पी एम बजे

शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त - 06:20 ए एम से 06:35 पी एम

अवधि - 12 घण्टे 15 मिनट्स

शीतला अष्टमी के दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:33 ए एम    

अभिजित मुहूर्त- 12:03 पी एम से 12:52 पी एम    

विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:19 पी एम

गोधूलि मुहूर्त- 06:23 पी एम से 06:47 पी एम    

सायाह्न सन्ध्या- 06:35 पी एम से 07:45 पी एम

अमृत काल- 10:05 ए एम से 11:36 ए एम    

निशिता मुहूर्त- 12:03 ए एम, मार्च 26 से 12:50 ए एम, मार्च 26

शीतला माता की कथा-

एक पौराणिक कथा के अनसुसार, एक दिन बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा। मान्यता के मुताबिक अष्टमी के दिन बासी चावल माता शीतला को चढ़ाए व खाए जाते हैं। लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह ताजा खाना बना लिया। क्योंकि हाल ही में दोनों की संताने हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना पहुंचाए। सास को ताजे खाने के बारे में पता चला तो उसने नाराजगी जाहिर की। कुछ समय बाद पता चला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई है। इस बात को जान सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया।

शवों को लेकर दोनों बहुएं घर से निकल गईं। बीच रास्ते वो विश्राम के लिए रूकीं। वहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली। दोनों ही अपने सिर में जूंओं से परेशान थी। उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वो दोनों के सिर को साफ करने लगीं। कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला। शीतला और ओरी ने बहुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए।

ये बात सुन दोनों बुरी तरह रोने लगीं और उन्होंने महिला को अपने बच्चों के शव दिखाए। ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि उन्हें उनके कर्मों का फल मिला है। ये बात सुन वो समझ गईं कि शीतला अष्टमी के दिन ताजा खाना बनाने के कारण ऐसा हुआ है। ये सब जान दोनों ने माता शीतला से माफी मांगी और आगे से ऐसा ना करने को कहा। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया। इस दिन के बाद से पूरे गांव में शीतला माता का व्रत धूमधाम से मनाए जाने लगा।