प्रकृति संरक्षण

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क   

हरित वातावरण,किल्लोलिनी सरिता, 

वन कानन,जल संसाधन,शुद्व मृदा,

हर कुछ देती है प्रकृति हमारी,

आओ करें प्रकृति संरक्षण की तैयारी।

रोज रोज कर रहे दुषित हम वातावरण को,

निज स्वार्थ हेतु काट रहे वृक्ष और सघन वन को,

मेघ भी रूठ गया है देख ऐसी कृत्य हमारी,

आओ करें प्रकृति संरक्षण की तैयारी...

विष भर गया हवाओं में,हिमनद रहे पिघल,

रो रही है धरा हमारी,कम्पित हुआ हिमाद्रि अटल,

पूछ रही है धरती माँ,कहाँ गयी मानवता तुम्हारी,

आओ करें प्रकृति संरक्षण की तैयारी...

इतना कुछ हमें देती है यह,

अभिलिप्सित मानव भूल गया सब।

कोरोना महामारी भी कोप है इस भूल का,

सचेते ना अब भी तो भुगतेगी पीढियां हमारी,

आओ करें प्रकृति संरक्षण की तैयारी...

                  रीमा सिन्हा (लखनऊ)