आई है होली

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


चलो आओ मिलकर 

रंगों भरे उत्सव को मना लें

आयी है होली

क्यों न दुश्मन को भी

गले लगा लें


थोड़ा गुलाल मैं लगाऊं

थोड़ा तुम भी लगा लो

चलो आज बिना भांग के ही

थोड़ा ठुमका मैं लगाऊं

थोड़ा तुम भी लगा लो

चलो आज मिलकर

रंगों भरे उत्सव को मना लें


लाल पीला हरा गुलाबी

हर तरफ बिखरे हैं

खुशियों के रंग

वो देखो आई है बच्चों की टोली

क्यों न बच्चों के साथ मिलकर

थोड़ा खुद को बचपना याद दिला दें

चलो आज मिलकर

रंगों भरे उत्सव को मना लें


दिल में कोई मलाल न रहे अब

दो मीठे बोल ,बोल कर

सभी गिले शिकवे मिटा लें

चलो प्यार के रंग से रंग दें सब को

थोड़ा सबका मुँह भी मीठा करा दें

चलो आज मिलकर

 रंगों भरे उत्सव को मना लें


मौलिक रचना

रीटा मक्कड़