वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स 2022 – हम इतने नाखुश क्यों ?

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क                    

शुक्र है खुशियों को भी मापने का मानक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है अन्यथा दुनियां को यह पता ही नहीं चल पाता की सबसे अधिक खुशहाल और नाखुश किस देश के लोग है | सयुंक्त राष्ट्र के वार्षिक सूचकांक की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2022 अब पूरी दुनियां के सामने है | खुशहाल और नाखुश देशों की रैंकिंग से आप कई बातों का न केवल अंदाजा लगा सकते है, बल्कि इस बात को भी समझ सकतें हैं कि इस रैंकिंग की उपयोगिता कितनी है | विगत 10 वर्षो से यह रैंकिंग जारी की जा रही है | इस रैंकिंग की शुरुआत वर्ष 2012 में की गयी थी | तकरीबन 150 देशों के लोगों को इस रैंकिंग के सर्वे में शामिल किया जाता है | इसके मूल्यांकन करने का आधार है – 1.  प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2. सामाजिक समर्थन 3. स्वस्थ्य जीवन प्रत्याशा 4. जीवन विकल्प चुनने की आजादी 5. उदारता और 6. भ्रष्टाचार की धारणा | यानि की इन पहलुओं के जरियें यह जानने का प्रयास किया जाता है की किस देश के लोग कितने खुशहाल है | 

वर्ष 2022 की जारी की गयी रैंकिंग में सबसे खुशहाल देशों की श्रेणी में प्रथम स्थान पर “फ़िनलैंड” है | प्रथम स्थान पर इसे आने के पीछे मुख्य कारण यह है कि - यह देश विशाल जंगलों और झीलों का देश स्वस्थ जीवन, प्रति व्यक्ति आय, मुसीबत के समय सामाजिक समर्थन, कम भ्रष्टाचार, सोशल ट्रस्ट, समुदाय में उदारता और जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता के लिए दुनियां भर में जाना जाता है | दूसरे स्थान पर “डेनमार्क”, तीसरे स्थान पर “आइसलैंड”, चौथे स्थान पर “स्विट्ज़रलैंड” और पाँचवे स्थान पर “नीदरलैंड्स” है | यदि हम विश्व के पांच सबसे शक्तिशाली देशों की बात करें तो उनकी वर्ल्ड हैप्पीनेस रैंकिंग कुछ इस प्रकार है – यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका 16वें स्थान पर, चाइना 72वें स्थान पर, रूस 80वें स्थान पर जर्मनी 14वें स्थान पर और यूनाइटेड किंगडम 17वें स्थान पर है | बात भारत की हो तो यह रैंकिंग में 136वें स्थान पर है जबकि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की इसमें रैंकिंग 94वें स्थान पर, नेपाल 84वें स्थान पर, पाकिस्तान 121वें स्थान पर और श्रीलंका 127वें स्थान पर है | हाँलाकि भारत की पिछले वर्ष की रैंकिंग की तुलना में तीन पायदान की उन्नति हुई है फिर भी पड़ोसी देशो की रैंकिंग में बेहतर स्थिति कई सवाल जरुर पैदा कर रही है |

रैंकिंग में सबसे निचले पायदान या यूँ कहें सबसे नाखुश देश की बात करें तो वह “अफगानिस्तान” है | अफगानिस्तान की रैंकिंग कुल 146 देशों में सबसे निचले स्तर यानि की 146वें स्थान पर है | 145वें स्थान पर लेबनान, 144वें स्थान पर ज़िम्बाब्वे, 143वें स्थान पर रवांडा और 142वें स्थान पर बोत्सवाना देश है | कोरोना काल के दो वर्षो से अधिक समय की वैश्विक महामारी की वजह से दुनियां के कई देशों में बेरोजगारी, आर्थिकमंदी, अवसाद और अस्थिरता को जन्म दिया है जिसका खामियाजा हर तरफ देखने को मिल रहा है | ऐसे में वर्ल्ड हैप्पीनेस की यह रैंकिंग अपने आप में कई प्रश्नों को एक साथ जन्म देने के साथ-साथ कई प्रश्नों का जबाब भी दे रही है | वैश्विक स्तर पर जब भी कोई रैंक जारी की जाती है तो उसके पीछे की सोच यही रहती है कि आम जन के बीच सच्चाई पहुँचाईजा सकें, जिससे जीवन के मूल्यों और उसकी वास्तविक स्थिति का पता चल सकें |

यदि भारत का मूल्यांकन इस रैंकिंग में करें तो कुल 146 देशों की रैंक में भारत की अपनी स्थिति 136वें पायदान पर है यानि की मात्र 10 देश भारत से रैंकिंग में पीछे है जबकि 135 देश भारत से रैंकिंग में आगे है | विगत के 3 दशकों की उपलब्धि को यदि हम टटोलने और समझने का प्रयास करें तो लोगों पर बाजारवाद भारी पड़ रहा है साथ ही उन्नति के लिए विकल्पों में भारी कमी भी आयी है | औसत प्रति व्यक्ति आय जहाँ बेहतर हुई है वही आय की असामनता ने कई सामाजिक बुराइयों और संघर्षो को भी जन्म दिया है | सामाजिक सुरक्षा की कई नीतियों में कमियां आयी है बल्कि मुसिबत के समय आज के आधुनिकतम युग में अपने भी साथ छोड़ने से गुरेज नहीं कर रहें है | देश में भ्रष्टाचार के कई स्वरुप नए स्वीकार्य रूप में सबके सामने है | सोशल ट्रस्ट में न केवल कमी आयी है बल्कि लाभ - हानि के लिए योजना कार्य रिश्तें भी बनने - बिगड़ने लगे हैं | समुदाय में उदारता की भी बड़ी कमी अब दिखने लगी है | अब सरकारों की योजनायें वोट बैंक केन्द्रित हो चुकी है | नतीजा न केवल लोग नाखुश है, बल्कि वर्ल्ड हैप्पीनेस रैंकिंग में हमारी स्थिति दुनियां के पटल पर बेदर्दी से रख दी जा रही है | दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी आबादी की पीड़ा और दर्द आज भी जमीनीआवश्यकताओं को पाने के संघर्ष तक सीमित है | जबकि सरकारें वोट बैंक की राजनीति की जड़ में पहुँच चुकी है | ऐसे में हम वर्ल्ड हैप्पीनेस रैंकिंग में अपने पीछे के कुछ चुनिन्दा देश को देखकर आज भी खुश हो रहे है और शायद आगे भी होतें रहेगें | क्योंकि लोग और सरकार इसके लिए बराबर के दोषी है |

 डॉ. अजय कुमार मिश्रा 

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