युद्ध इंसानियत के लिए आजाब है

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


जिंदगी की सलामती जरूरी है

इंसानियत आदमी के लिए

युद्ध तो होते रहते हैं मुल्कों में

अहम की तिशनगी के लिए ,


कोई हारा कोई जीता

पर वक्त गवाह रहेगा

मां बाप के लाशों पर बच्चे रोएं

अपनी जिंदगी के लिए,


सब वीरान उजाड़ करके

यह क्रूर समय भी बीत जाएगा

पर बारूद से छलनी हृदय

रोएंगे बर्बाद जमी के लिए,


आवाजों से  वह नींद मे

चिहुक कर चौक जाता

जाने कौन सा पल आखरी हो

उसकी  बेकसूर जिंदगी के लिए, 


अब तो एक ऐसी दुनिया

बना ही दे ऊपर वाले

जहां इंसानियत शर्त  हो

हर एक आदमी के लिए,


नोचते रहे एक दूसरे को

यह जमी के भूखे  -प्यासे

चलो दिलों में घर बनाए

एक दूजे की खुशी के लिए,


रेखा शाह आरबी

बलिया (यूपी)