पार्टी

                                            
 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

आईटी प्रोफेशन की अंतहीन मीटिंग्स पूरे सप्ताह झेलते हुए  अमन और उसके चारों दोस्त शुक्रवार आते ही दोस्तो के साथ पार्टी जश्न मनाने की पृष्ठभूमि तैयार करने लगते। महानगर के 15वे फ्लोर में फ्लैट में चारो रहते थे। शहर के पांच और दोस्तो को पार्टी के लिए निमंत्रित किया।

शनिवार की शाम से उनका घर गुलजार था, रात 9 बजे से ही म्यूजिक की आवाज़ दूर तक शोर मचा रही थी। ये सारे के सारे अमीर खानदान के सुपुत्र ही थे और कमाई भी शानदार थी। फिर किस बात की कमी न खाने की और न ही पीने की, ऑनलाइन खाना भी आर्डर हुआ, कुछ कुक ने भी बना दिया।

स्टार्टर्स के साथ ही बोतले खुलने लगी, डांस और गाने भी वातावरण को रंगीन बनाने लगे। जम के पार्टी मनाने का दौर सुबह 4 बजे तक चलता रहा। फिर जिसको जहां जगह मिली, नींद ने दबोच लिया।

अचानक सुबह नौ बजे इण्टरकॉम की घंटी बजने लगी। अमन बंद आंखों से ही फ़ोन उठाकर बोला, "कौन है"

"आवाज़ आयी, हम नीचे के फ्लैट से बोल रहे, आपके घर मे आग लगी है, किचन की खिड़की से धुआं निकल रहा।"

कूदकर अमन किचन का दरवाजा खोलकर वहां पहुँचा तो देखकर चकित रह गया, धुआं ही धुआं, बीच मे कोई लेटा हुआ सा लगा। घबराहट में यही सोचा, कोई दोस्त स्वाहा हुआ। भागकर कमरे में आकर सबको गिना, तो सब पूरे थे।

फिर सबको उठाया, सबने बाल्टियों से पानी डाला, पता चला, बीन बैग में कोई ने जलती सिगरेट छोड़ दिया था, और वो ऐसे जला कि देखने मे कोई मनुष्य पड़ा हो। 

किसी तरह आग ठंडी हुई, थोड़ी देर और होती तो सिलिंडर  जो उससे एक फुट की दूरी पर था, कुछ और तमाशा दिखाता।

अब सबकी आंखे और दिमाग दोनो खुल चुका था, पार्टी समाप्त हो चुकी थी।

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर