हजारों ठोकरें खाने के बाद ही अच्छे चरित्र का निर्माण होता है

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको। शक्ति जीवन है तो निर्बलता मृत्यु। हजारों ठोकरें खाने के बाद ही अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। जब आप व्यस्त होते हैं तो सब कुछ आसान सा लगता है परंतु आलसी होने पर कुछ भी आसान नहीं लगता है। प्रेम जीवन है तो द्वेष मृत्यु। जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी। जिस दिन आपके सामने समस्या न आए आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं। जब तक जीना, तब तक सीखना। अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। भय ही पतन का मुख्य कारण है। 

इन शिक्षाओं से दुनिया को जागृत करने वाले स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी जी का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनके पिताजी प्रख्यात वकील थे। कॉन्वेंट में पढ़े स्वामी जी बचपन से ही काफ़ी जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे और उनकी इसी प्रवृत्ति ने उन्हें ईश्‍वर को समझने और सनातन धर्म को जानने की दिशा में आगे बढ़ाया। मात्र 25 साल की आयु में स्वामी विवेकानंद घर छोड़कर संन्यासी हो गए। संन्यास लेने के बाद ही उनका नाम स्वामी विवेकानंद पड़ा। श्रीरामकृष्ण परमहंस को स्वामी विवेकानंद ने अपना गुरु माना। श्रीरामकृष्ण परमहंस से उनकी मुलाकात कलकत्ता के दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में हुई और उनकी विचारधारा से स्वामी विवेकानंद इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपना गुरु मान लिया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की जो आज भी अपना काम कर रहा है। स्वामीजी ने दुनिया को बताया कि भारत की संस्कृति और सभ्यता क्या है। स्वामी जी के के विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने देश और समाज को नई चेतना दी और विकासशील दिशा की ओर अग्रसर करने में अहम योगदान दिया।