॥ बागवान ॥

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


जिस बाग में माली नहीं होता है

वह बाग निश्चय ही उजड़ जाता है

जिस बाग में माली मौजूद रहता है

वह बाग कभी उजड़  ही नहीं पाता हे


जिस बाग में माली भी रहता है

कलियाँ खिल खिल मुस्कुराती है

जब माली ही बाग से उजड़ जाता है

चमन की हर कलियाँ बिखर जाता है


जिस बाग में माली भी रहता है 

वो चमन गुलजार बन जाता  है

जब माली ही उजड़ जाता     है

गुलशन वीरान हो  जाता     है


जिस बाग में माली रहता   है

हरा भरा पौधा लहलहाता है

जब माली ही उजड़ जाता है

गुलशन श्मशान हो जाता है


जिस बाग में माली रहता    है

कलियों को कोई छू नहीं पाता है

जब माली ही उजड़   जाता   है

कलियों का अस्मत बच नहीं पाता है


जिस बाग में माली रहता है

कलियाँ सुरक्षित भी रहती है

जब माली ही उजड़ जाता है

कलियों का हरण हो जाता है


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088