बन्द करो

 युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क


मनोरंजन के नाम पर,

क्यों अश्लीलता परोसी जाती है?

कर कमजोर नींव राष्ट्र की,

क्यों जरा शर्म नहीं आती है?


क्या फिल्में क्या टीवी सीरियल,

सबमें हिंसा दर्शाते हैं।

पैसे और नाम की खातिर,

क्यों सब पार हदें कर जाते हैं?


अभद्र भाषा का प्रयोग कर,

जहर मन में भर जाते हैं।

संस्कारों और सदाचार की,

बलि सरेआम चढ़ाते हैं।


अश्लीलता का तड़का लगा,

स्वाद नया चखाते हैं।

लगा मिर्च मसाला प्रोडक्ट पर,

अपना बाजार सजाते हैं।


चोरी, डकैती और अपहरण,

जैसे पाप कराते हैं।

बलात्कार से कृत्य घिनौने,

करने को उकसाते हैं।


नशे में धुत हीरो हीरोइन,

लत नशे की हमको लगाते हैं।

त्याग कर सारी शर्म हया,

समाज को दूषित कर जाते हैं।


छीन बचपन बच्चों से क्यों,

पथ से उनको भटकाते हैं।

भरोसा, विश्वास और धैर्य को,

क्यों सूली पर लटकाते हैं?


बन्द करो ये खेल तमाशे,

अब अपनी दुकानें बन्द करो।

कर सको भला ना समाज का,

बर्बादी का बिजनेस बन्द करो।


मिला ना जीवन हम सबको,

यूं ही व्यर्थ गंवाने को।

आए हैं हम मानव धरा पर,

नया इतिहास रचाने  को।


स्वरचित

सपना 

जनपद-औरैया

उत्तर प्रदेश