अछरौड़ बस्ती के अंदर से बालू भरे ट्रक निकालने पर ग्रामीण परेशान

                                 
युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

-उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चाही कार्यवाही

बांदा। शासनादेश के विपरीत गांव की बस्ती के अंदर से सैकड़ों बालू भरे ओवरलोड ट्रक रोज निकाले जा रहे हैं। जिसमें गांव के आम ग्रामीणों सहित राह के किनारे पड़ने वाले विद्यालय उनके शिक्षक, शिक्षार्थी और अभिभावक परेशान हैं। बस्ती के अंदर से बालू भरे ओवरलोड ट्रक निकालने को लेकर ग्रामीणों द्वारा जब विरोध किया जाता है तो खदान संचालक और उनके गुर्गे इस कदर जवाब देते हैं कि मानो केन नदी की यह खदान और गांव की सड़क इन्होंने अपने लिए अपने धन से बनवाई हो। बालू भरे ट्रक निकलने से न केवल ग्रामीणों को दुर्घटनाओं की चिंता है बल्कि बीते दिन सड़क किनारे पड़ने वाले खलिहान में पानी भर जाने के कारण नजदीक में स्थित एक मकान भी ट्रक की धमक से गिर गया और जनहानि होने से बच गई। अछरौड़ खदान द्वारा की जाने वाली मनमानी की कहानी का ब्यौरा जिले में बैठे आला अधिकारियों तक भिजवाया गया लेकिन खदान संचालक की शह पर चलने वाले ट्रकों में रोकथाम के लिए कोई कार्यवाही नहीं हुई। ग्राम प्रधान विनोद यादव सहित विश्व हिंदू महासंघ, हिंदू वाहिनी मातृ शक्ति की संतोष मिश्रा ने हालातों की जानकारी उच्चाधिकारियों तक भिजवायी और खदान क्षेत्र के थाना मटौंध के एसएचओ से मिलकर पूरा काला चिट्ठा बताया लेकिन उन्होंने शिकायत में कार्यवाही के बदले शिकायतकर्ताओं को यह कहकर चुप कर दिया कि अगर ज्यादा नेतागिरी करोगे तो इतने मुकदमें लाद दूंगा कि नेतागिरी समझ में आ जाएगी। 

जिले में बालू की चलायी जा रही खदानों की कहानी सही मायने में इतनी गयी गुजरी होकर रह गई है कि अधिकांशतः खदानों में सरकार द्वारा तैयार की गई खनिज गाइड लाइन का पालन नहीं हो पा रहा। खदान संचालक अपने तरीके से कमाई के खातिर तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर बालू के कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। इस तरह की शिकायतें और खबरें भी आए दिन प्रकाश में आती हैं लेकिन कार्यवाही के नाम पर अंधेरा छाया हुआ है। कार्यवाही न होने के पीछे का सच क्या है यह तो भगवान जानता होगा लेकिन जिस तरीके से खदान संचालक जिले की सड़कों को ध्वस्त करने के साथ राजस्व की चोरी करने पर अमादा हैं उससे सरकार की वह गाइड लाइन भी अंधेरे का शिकार होकर रह गई है जिसमें ओवरलोड रोकने के लिए खनिज खदानों में सीसी टीवी कैमरा और धर्मकांटा लगाए गए हैं। मानीटरिंग का हाल भी लगभग खस्ताहाल होने का आरोप लगाते हुए क्षेत्र के लोग खनिज ओवरलोड की तस्वीरें देखकर अनेक प्रकार के आरोप लगाते हैं। गाइड लाइन के विपरीत बालू का कारोबार चलाने के एक मामले में शहर मुख्यालय से लगभग 20 किमी. दूर केन के घाट में चलायी जा रही अछरौड़ खदान का मामला प्रशासनिक अधिकारियों के पटल तक पहुंचा है। जिसमें गांव के अंदर से बनी सड़क से खाली और बालू भरे ट्रकों को निकाला जा रहा है। आए दिन इन ट्रकों के कारण पूरा गांव में धूल का अंधेरा छाया रहता है। धूल के कारण पर्यावरण भी गंदा हो रहा है। आम आदमी के सामने शुद्ध हवा पाने में परेशानी का आरोप उठ रहा है। सड़क ध्वस्त हो रही है। आए दिन दुर्घटनाएं होते-होते बच रही हैं। यहां तक कि सड़क के किनारे मुन्नी यादव पुत्र लल्लू व उसकी मां का एक मकान भी बालू वाले वाहनों ने ऐसी टक्कर मारी कि वह धसक गया। गांव में सरकारी विद्यालय के शिक्षक, शिक्षार्थी, अभिभावक सबके सब परेशान हैं। हालांकि इन दिनों कोरोना को लेकर स्कूल बंद हैं लेकिन पूर्व में छोटे-छोटे बच्चे स्कूलों में जब पढ़ने जाते थे तो ट्रकों की आवाज से उन्हें परेशानी होती थी। वह अपने मास्टर और माता-पिता से हालातों की कहानी सुनाते थे। समस्या को लेकर ग्रामीणों ने मामला जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों तक भिजवाते हुए बस्ती के अंदर से निकाले जाने वाले बालू भरे वाहनों पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन जब कोई कार्यवाही न हुई तो ग्राम प्रधान विनोद यादव ने उच्चाधिकारियों को पत्र देकर शिकायत की और विश्व हिंदू महासंघ से जुड़े पदाधिकारी श्रीमती संतोष मिश्र की अगुवाई में शंभू धुरिया, शिवकांत बाजपेयी, महेश प्रजापति, चीता चौरसिया, आकर्ष पंडित आदि ने मामला क्षेत्रीय थानाध्यक्ष मटौंध को जाकर बताया। थानेदार ने उनकी आवाज ऐसे अनसुनी की जैसे उनके द्वारा की गई शिकायत झूठी हो और कोई मायने न रखती हो। जबकि बस्ती के अंदर से खनिज से लदे बालू भरे ट्रक निकालना अनियमित और अनुचित बताया जाता है। थानेदार ने शिकायत कर्ताओं से कहा कि चुपचाप घर जाओ और नही ंतो इतने केस लगा दूंगा कि शिकायत करना भूल जाओगे। यही नहीं जब बस्ती के अंदर से बालू भरे ट्रक निकालने का मामला सीओ तक पहुंचा तो उनका जवाब कुछ ऐसा था जिसे सुनकर शिकायतकर्ता दंग रह गए। शिकायतकर्ता के अनुसार सीओ ने शिकायत सुनकर यह कहा कि दोनो जनेउ-जनेउ वाले हो े मिलकर मामला सुलटा लो। बस्ती के अंदर से बालू भरे ट्रकों पर रोकथाम के लिए बस्ती के आम ग्रामीण परेशान हैं और उन्होंने उच्चाधिकारियों को इस बावत शिकायत करके रोकथाम लगाने की मांग की है। गांव के प्रधान सहित अन्य ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन में बैठे आलाधिकारियों का ध्यानाकृष्ट करके कार्यवाही करने की मांग की है।